क्या चांद पर पहुंचते ही इंसान बहरे हो जाते हैं? जानिए ऐसा क्यों होता है?
पृथ्वी पर एक इंसान दूसरे की आवाज इसीलिए सुन लेता है क्योंकि यहां गैसें उपलब्ध हैं और इन्हीं के माध्यम से हमारी आवाज ट्रेवल कर के दूसरे व्यक्ति के कान तक पहुंचती है.
दरअसल, ध्वनि, ऊर्जा का एक रूप है जो तरंगों के रूप में एक जगह से दूसरी जगह ट्रेवेल करती है. और यही ऊर्जा हमारे कान में सुनने के लिए संवेदन पैदा करती है.
आपको बता दें ध्वनि की उत्पत्ति कंपन्न से होती है. हालांकि, ये जरूरी नहीं है कि सभी कंपन्न ध्वनि ही हों. जिन कंपन्न को हम अपने कानों से सुन सकते हैं सिर्फ वही ध्वनि होती हैं.
दरअसल, आवाज को लोगों तक पहुंचने के लिए माध्यम की जरूरत होती है. हमारी आवाज को एक-दूसरे के सुनने के लिए गैसीय माध्यम की जरूरत होती है.
चन्द्रमा पर गैसें उपलब्ध नहीं हैं. ऐसे में चांद पर वायु का अभाव और निर्वात की स्थिति के कारण आवाज एक-दूसरे तक नहीं पहुंचती है.
यही वजह है कि चन्द्रमा पर हम अपनी आवाज नहीं सुन सकते. क्योंकि आवाज सुनने के लिए माध्यम की जरूरत होती है और चांद पर माध्यम अनुपस्थित होता है.