Indian Railways: जंक्शन, स्टेशन, सेंट्रल और टर्मिनल के बीच क्या होता है अंतर? आज मिल जाएंगे सभी सवालों के जवाब

ट्रेन से सफर करते समय हम कई स्टेशनों से होकर गुजरते हैं और वहां लगे बोर्ड पर कभी जंक्शन लिखा होता है तो कभी सेंट्रल, टर्मिनल या सिर्फ स्टेशन. ज्यादातर लोगों को लगता है कि ये सिर्फ नाम रखने का तरीका है, लेकिन असल में इन नामों के पीछे रेलवे का अपना एक तय नियम होता है. हर नाम कुछ खास जानकारी देता है, जैसे उस स्टेशन पर कितने रास्ते मिलते हैं या फिर वहां से ट्रेन आगे जा सकती है या नहीं. आइए जानते है इसके बारे में पूरी जानकारी.
सबसे पहले बात करें भारतीय रेलवे अपने स्टेशनों को मुख्य रूप से चार भागों में बांटता है. इनमें जंक्शन, सेंट्रल, टर्मिनल और सामान्य स्टेशन शामिल हैं. ये चारों नाम स्टेशन की बनावट, वहां मिलने वाले रास्तों और उसकी व्यस्तता के हिसाब से दिए जाते हैं. यही वजह है कि किसी शहर में स्टेशन का नाम सिर्फ स्टेशन होता है, तो किसी शहर में उसे सेंट्रल कहा जाता है, और किसी शहर में जंक्शन या टर्मिनल जैसे नाम जुड़े होते हैं.
जंक्शन की बात करें, तो जंक्शन उस स्टेशन को कहा जाता है, जहां कम से कम तीन अलग-अलग रास्ते आकर मिलते हैं. यानी उस स्टेशन पर ट्रेन एक साथ कई दिशाओं से आ भी सकती है और जा भी सकती है. भारत में तीन सौ से ज्यादा जंक्शन स्टेशन हैं. बता दें कि मथुरा जंक्शन को देश का सबसे बड़ा जंक्शन माना जाता है, क्योंकि वहां से सात अलग-अलग रास्ते निकलते हैं.
वहीं सेंट्रल स्टेशन उस स्टेशन को कहा जाता है, जो किसी शहर का सबसे बड़ा और सबसे व्यस्त स्टेशन होता है. ऐसे स्टेशन पर बाकी स्टेशनों की तुलना में ज्यादा ट्रेनें आती-जाती हैं और यात्रियों की भीड़ भी सबसे ज्यादा होती है. कई बार यह शहर का सबसे पुराना स्टेशन भी होता है.
इसके अलावा टर्मिनल और टर्मिनस दोनों शब्दों का मतलब एक ही होता है और इनमें कोई अंतर नहीं है. टर्मिनल उस स्टेशन को कहा जाता है, जहां से आगे रेलवे ट्रैक नहीं होता. यानी ट्रेन उस स्टेशन तक तो आ जाती है, लेकिन आगे बढ़ने के लिए उसे उसी दिशा में वापस लौटना पड़ता है, जिस दिशा से वह आई थी. देश में करीब सत्ताईस रेलवे टर्मिनल हैं. छत्रपति शिवाजी टर्मिनस, बांद्रा टर्मिनस और लोकमान्य तिलक टर्मिनस जैसे स्टेशन इसी श्रेणी में आते हैं.
अब बात करते हैं सामान्य स्टेशन की. रेलवे की इन चार श्रेणियों में जो स्टेशन जंक्शन, सेंट्रल और टर्मिनल की श्रेणी में नहीं आते, उन्हें सीधे-सीधे स्टेशन ही कहा जाता है. इन स्टेशनों की कोई खास पहचान नहीं होती और यहां सिर्फ एक रास्ता होता है, जिससे ट्रेन आती है और उसी रास्ते पर आगे बढ़ जाती है. इस तरह के स्टेशन आकार में भी बाकी तीनों श्रेणियों से छोटे होते हैं.