Earth Rotation: क्या पृथ्वी के घूमने की रफ्तार बढ़ सकती है, अगर ऐसा हुआ तो क्या होंगे परिणाम?
अगर पृथ्वी की घूमने की गति बढ़ती है तो इसका सबसे सीधा असर यह होगा कि दिन छोटे हो जाएंगे. हर दिन कुछ मिली सेकंड कम होने से समय के साथ यह अंतर बढ़ जाएगा. एटॉमिक घड़ियां जो ग्लोबल टाइम स्टैंडर्ड तय करती है काफी ज्यादा सटीकता पर आधारित होती हैं. लगातार तेजी से घूमने की वजह से वैज्ञानिकों को नेगेटिव लिप सेकंड शुरू करना होगा. इसमें पृथ्वी के तेजी से घूमने से मेल खाने के लिए आधिकारिक समय से एक सेकंड हटा दिया जाएगा.
आधुनिक टेक्नोलॉजी समय के अंतर के प्रति काफी ज्यादा संवेदनशील है. जीपीएस नेवीगेशन, सैटलाइट कम्युनिकेशन, स्टॉक एक्सचेंज, पावर ग्रिड और इंटरनेट जैसे सिस्टम सेकंड के कुछ हिस्सों तक सटीक सिंक्रोनाइज्ड घड़ियों पर निर्भर होते हैं. पृथ्वी के घूमने और एटॉमिक टाइम के बीच बेमेल की वजह से नेविगेशन में गड़बड़ी, डेटा लॉस, नेटवर्क में दिक्कत और फाइनेंशियल सिस्टम में रुकावट पैदा हो सकती है.
तेजी से घूमते पृथ्वी सेंट्रीफ्यूगल फोर्स को बढ़ाएगी. ऐसा भूमध्य रेखा के आसपास ज्यादा होगा. यह फोर्स समुद्र के पानी को ध्रुव से दूर और भूमध्यरेखीय क्षेत्र की तरफ धकेलेगा. इसका नतीजा यह हो सकता है की भूमध्य रेखा के पास समुद्र का स्तर ऊंचा हो जाएगा और ध्रुव के पास कम हो जाएगा. इससे ट्रॉपिकल देशों में कोस्टल रीजंस के पास बाढ़ आ सकती है.
जैसे-जैसे सेंट्रीफ्यूगल फोर्स बढ़ता है यह भूमध्य रेखा पर गुरुत्वाकर्षण का ज्यादा मजबूती से मुकाबला करता है. इससे गुरुत्वाकर्षण थोड़ा कमजोर हो जाएगा जिसका मतलब है कि लोगों और चीजों का वजन थोड़ा कम होने लगेगा.
घूमने की रफ्तार में तेजी से पृथ्वी की पपड़ी पर ज्यादा तनाव पड़ेगा. वैज्ञानिकों का मानना है कि इससे भूकंप और ज्वालामुखी फटने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं.
तेज घूमने से कोरिओलिस प्रभाव तेज होगा जो यह तय करता है की हवा और समुद्र की धाराएं कैसे चलती हैं. इससे तेज हवाएं, ज्यादा शक्तिशाली चक्रवात और तूफान और मौसम में ज्यादा अस्थिरता आ सकती है.