Human Immortality: क्या भविष्य में अमर हो सकता है इंसान, जानें कौन-कौन से देश इस पर कर रहे काम?
आधुनिक विज्ञान अमरता को पूरी तरह से मौत को रोकने के बजाय स्वस्थ जीवन को बढ़ाने के रूप में देख रहा है. 21वीं सदी के बीच तक विज्ञान का लक्ष्य इंसानों को अच्छे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में 120 से 150 साल तक जीने देना है.
नोबेल पुरस्कार विजेता शिन्या यामानाका की खोज के आधार पर वैज्ञानिक व्यस्क कोशिकाओं को युवावस्था में रिसेट करने के प्रयोग कर रहे हैं. अमेरिका में ऑलटोस लैब ऐसी कंपनियां जेनेटिक स्तर पर कोशिकाओं को फिर से जीवंत करने में लगी हैं.
फ्यूचरिस्ट्स ऐसी भविष्यवाणी करते हैं कि नैनो बोट इंसानी शरीर के अंदर घूम कर डीएनए के साथ हुई गड़बड़ी की मरम्मत कर सकती हैं, कैंसर कोशिकाओं को नष्ट कर सकती हैं और जहरीले पदार्थ को हटा सकती हैं.
एक और क्रांतिकारी विचार डिजिटल अमरता है. यहां इंसानी यादों या फिर चेतना को कंप्यूटर में ट्रांसफर किया जा सकता है. हालांकि है अभी भी सैद्धांतिक है.
वैज्ञानिक स्टेम कोशिकाओं को 3D प्रिंटिंग का इस्तेमाल करके प्रयोगशाला में अंग उगाना सीख रहे हैं. यह खराब दिल, गुर्दे या लिवर को रोगी के मुताबिक बनाए गए और लैब में उगाए गए संस्करण से बदलने में मदद करके मौत की वजह के रूप में अंग की खराबी को खत्म कर सकता है.
संयुक्त राज्य अमेरिका ऑल्टोस लैब, कैलिको और न्यूरालिंक जैसी कंपनियों के साथ इस काम में लगा है. चीन जेनेटिक रिसर्च और एआई आधारित दवा खोजने में भारी निवेश कर रहा है. इसी के साथ जापान और दक्षिण कोरिया स्टेम सेल थेरेपी और उम्र से संबंधित बीमारियों को ठीक करने पर निवेश कर रहे हैं. वहीं सिंगापुर एक पूरा लॉन्गेविटी बायोटेक इकोसिस्टम बना रहा है. इसी के साथ यूएई ने नेशनल लॉन्गेविटी स्ट्रेटजी शुरू की है. वहीं यूके कैंसर वैक्सीन और अल्जाइमर को ठीक करने पर एडवांस ट्रायल कर रहा है.