क्या आम आदमी भी बुक कर सकता है प्राइवेट प्लेन, इसमें कितना खर्चा आता है?
सबसे पहले इस भ्रम को तोड़ना जरूरी है कि प्राइवेट जेट सिर्फ उद्योगपतियों या सेलिब्रिटीज के लिए होते हैं. हकीकत यह है कि आम आदमी भी प्राइवेट प्लेन बुक कर सकता है. इसके लिए न तो किसी खास पहचान की जरूरत होती है और न ही सरकारी परमिशन की, बस आपकी जेब मजबूत होनी चाहिए.
भारत में कई चार्टर एविएशन कंपनियां हैं, जो जरूरत के हिसाब से प्राइवेट जेट, हेलीकॉप्टर और छोटे चार्टर प्लेन किराए पर देती हैं. भारत में प्राइवेट जेट का किराया आमतौर पर प्रति घंटे के हिसाब से तय होता है.
छोटे और हल्के चार्टर जेट के लिए प्रति घंटे का खर्च करीब 1.5 लाख से 2 लाख रुपये तक होता है. वहीं, मिड-साइज जेट्स का किराया 4 लाख से 6 लाख रुपये प्रति घंटे तक जा सकता है. अगर आप लग्जरी और बड़े जेट्स जैसे गल्फस्ट्रीम या बॉम्बार्डियर बुक करते हैं, तो खर्च 8 लाख रुपये प्रति घंटे से भी ज्यादा हो सकता है.
मतलब साफ है कि सिर्फ 2 से 3 घंटे की उड़ान में ही 10 से 20 लाख रुपये तक का बिल बन सकता है, जो किसी मिडिल क्लास परिवार की सालभर की कमाई के बराबर हो सकता है.
बुकिंग से अलग, अगर कोई व्यक्ति खुद का प्राइवेट जेट खरीदना चाहता है, तो कहानी और भी महंगी हो जाती है. भारत में एक छोटे प्राइवेट प्लेन की कीमत करीब 15 से 35 करोड़ रुपये से शुरू होती है.
मिड-साइज और एडवांस जेट्स की कीमत 100 करोड़ रुपये के आसपास पहुंच जाती है. वहीं, इंटरनेशनल लेवल के लग्जरी जेट्स की कीमत 300 से 500 करोड़ रुपये या उससे भी ज्यादा हो सकती है.
पुराने और सेकंड हैंड जेट्स कुछ सस्ते मिल जाते हैं, जिनकी कीमत 16 से 20 करोड़ रुपये तक हो सकती है, लेकिन इनमें भी रखरखाव का खर्च कम नहीं होता. एक जेट को रखने के लिए एयरपोर्ट पर हैंगर चार्ज देना पड़ता है, जो सालाना लाखों से करोड़ों रुपये तक हो सकता है. इसके अलावा इंश्योरेंस, मेंटेनेंस और तकनीकी जांच पर हर साल करीब 1 से 1.5 करोड़ रुपये खर्च होते हैं.