Rain Bubbles: बारिश के पानी से बन रहे बुलबुले, क्या इससे सच में ज्यादा गिरता है पानी; क्या है इसका साइंस?

Rain Bubbles: क्या आपने कभी यह कहावत सुनी है कि बारिश के दौरान अगर पानी के जमाव में बुलबुले बनने लगें तो बारिश और तेज हो सकती है? यह पुरानी मान्यता पूरी तरह से गलत नहीं है. इसके पीछे एक काफी बड़ी वैज्ञानिक वजह है. आइए जानते हैं क्या है इसका सच.
जब बारिश की भारी बूंदें तेजी से पानी के जमाव या फिर रुके हुए पानी पर गिरती हैं तो वे छोटे गड्ढे बनाती हैं. इनमें हवा के छोटे पॉकेट फंस जाते हैं. जैसे ही पानी इन हवा के पॉकेट के ऊपर तेजी से बंद होता है सतह पर बुलबुले बन जाते हैं.
पानी के मॉलिक्यूल सर्फेस टेंशन की वजह से स्वाभाविक रूप से एक दूसरे को आकर्षित करते हैं. यह बल फंसी हुई हवा के चारों तरफ एक पतली, लचीली परत बनाता है जिससे बुलबुला तुरंत फटने के बजाय बना रहता है.
सड़क की धूल, गाड़ियों का तेल, पराग और ऑर्गेनिक कण जैसी चीजें प्राकृतिक सर्फेक्टेंट की तरह काम करती हैं. वे बुलबुले की बाहरी परत को मजबूत बनाती हैं. इससे वह ज्यादा स्थिर हो जाता है और पानी की सतह पर ज्यादा देर तक तैर सकता है.
बूंदाबांदी या फिर हल्की बारिश के दौरान बारिश की बूंदे छोटी होती हैं और कम रफ्तार से गिरती हैं. क्योंकि उनमें पानी के नीचे हवा फंसाने के लिए जरूरी ताकत नहीं होती इस वजह से ऐसी स्थिति में देर तक टिकने वाले बुलबुले शायद ही कभी दिखाई देते हैं.
नमी वाला मौसम हर बुलबुले के चारों तरफ पानी की एक पतली परत के वाष्पीकरण को धीमा कर देता है. यही वजह है कि बुलबुले ज्यादा देर तक दिखाई देते हैं. इससे यह पता चलता है कि मौसम की स्थिति लगातार या फिर तेज बारिश के लिए अनुकूल है.
वैज्ञानिकों का ऐसा कहना है कि बुलबुले अपने आप में मौसम का पूर्वानुमान लगाने का साधन नहीं हैं. क्योंकि वे तेज बारिश, बड़ी बूंद और ज्यादा नमी के दौरान सबसे आसानी से बनते हैं इस वजह से उनकी मौजूदगी अक्सर तेज या फिर लंबी बारिश से जुड़ी होती है.