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ब्रिटेन में गर्मी के चलते ट्रेनों के संचालन पर रोक, इससे कैसे रुकती है हीटवेव?

निधि पाल   |  30 Jun 2026 06:20 PM (IST)
ब्रिटेन में गर्मी के चलते ट्रेनों के संचालन पर रोक, इससे कैसे रुकती है हीटवेव?

ब्रिटेन इन दिनों भीषण गर्मी और रिकॉर्ड तोड़ हीटवेव का सामना कर रहा है. वहां पर पारा 40 डिग्री सेल्सियस के तापमान के पार कर चुका है. मौसम विभाग ने जान-माल के खतरे को देखते हुए देश में रेड अलर्ट जारी कर दिया है, जिसके बाद स्कूल बंद कर दिए गए हैं और रेल सेवाओं को रोक दिया गया है. आमतौर पर लोग सोचते हैं कि क्या ट्रेनें रोकने से हीटवेव रुक जाएगी? चलिए जानते हैं.

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ब्रिटेन में ट्रेन रोकने की बात पर सभी के मन में यह सवाल आ रहा है कि क्या इससे गर्मी में कुछ असर पड़ेगा. लेकिन सच यह है कि ट्रेनें सीधे तौर पर मौसम को गर्म नहीं करती हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर वे कुछ गर्मी जरूर पैदा कर देती हैं.

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जब एक भारी-भरकम ट्रेन तेज रफ्तार से ट्रैक पर दौड़ती है तो पहिओं और पटरियों के बीच में जबरदस्त घर्षण उत्पन्न होता है, जिससे भारी मात्रा में ऊष्मा निकलती है. इसके साथ ही आधुनिक बोगियों में लगे बड़े-बड़े एसी डिब्बों के अंदर की गर्मी को खींचकर बाहर फेंकते हैं, जिससे रेलवे ट्रैक और इससे आसपास गर्मी और उमस बहुत महसूस होती है.

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इसके अलावा लोहे की बनी रेल की पटरियों पर सीधी और चिलचिलाती धूप तेज पड़ती है, जिससे इसका घातक असर होता है. जब वातावरण का तापमान 30 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच जाता है, तो सीधी धूप के संपर्क में रहने से स्टील पटरियां गर्म होकर 50 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा तपने लगती है.

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विज्ञान के नियम के अनुसार अत्यधिक गर्मी मिलने पर धातु फैलने लगती है. अगर पटरियों के जोड़ों के बीच फैलन के लिए पर्याप्त जगह न बची हो तो वे बीच से चटख या मुड़ जाती हैं, जिसे तकनीकी भाषा में बकलिंग कहा जाता है. ऐसे मुड़े हुए ट्रैक पर ट्रेन चलाने से उसके पटरी से उतरने का खतरा होता है.

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ट्रेनें रोकने के लिए सिर्फ पटरियां ही जिम्मेदार नहीं हैं, बल्कि ट्रेन के ऊपर दौड़ने वाले बिजली के तार भी इसकी एक बड़ी वजह हैं. तेज गर्मी की वजह से ओवरहेड बिजली सप्लाई वाले तारों में भी थर्मल विस्तार होता है, जिससे वे ढीले होकर नीचे की ओर लटक जाते हैं.

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जब भी कोई हाई स्पीड ट्रेन इन ढीले तारों के नीचे से गुजरती है, तो ट्रेन के ऊपर लगा पेंटोग्राफ (बिजली खींचने का उपकरण) इन तारों में बुरी तरह से उलझ सकते हैं. इससे न सिर्फ ओएचई लाइनें टूटकर गिर सकती हैं, बल्कि शॉर्ट सर्किट होने से पूरी ट्रेन में करंट फैलने का खतरा है.

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ऐसी परिस्थिति में ब्रिटेन का रेल प्रबंधक फूंक-फूंककर कदम रखता है. जब तापमान बहुत ज्यादा बढ़ता है तो ट्रेनों की गति सीमा को धीमा कर दिया जाता है. धीमे चलने पर गर्म हो चुकी पटरियों पर कम वजन और घर्षण होता है.

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इस वजह से पटरियों के अचानक मुड़ने या बकलिंग की आशंका काफी हद तक खत्म हो जाती है. लेकिन जब पारा कंट्रोल से बाहर जाकर 40 डिग्री के पार पहुंच जाता है तब किसी भी हादसे को रोकने के लिए रेल नेटवर्क पर लगाम लगानी जरूरी हो जाती है.

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