'फुले' से पहले इन फिल्मों में उजागर की गई जातिवाद की सच्चाई, देखकर खड़े हो जाएंगे रौंगटे
अनंत महादेवन की फुले इस महीने की 25 तारीख को रिलीज हो रही है. प्रतीक गांधी और पत्रलेखा स्टारर ये फिल्म ज्योतिराव फुले और सावित्रीबाई फुले की लाइफ पर बेस्ड है. इस फिल्म में जातिगत सच्चाई को दिखाया गया है.
साल 2021 में रिलीज हुई जय भीम में साउथ सुपरस्टार सूर्या ने लीड रोल प्ले किया था. ये फिल्म भी समाज को आईना दिखाती है. इस फिल्म जातिगत भेदभाव को दिखाया गया है. इसमें तमिलनाडु की एक जाति के साथ हुए उत्पीडन की कहानी दिखाई गई है. फिल्म को टीजे ग्नानवेल ने निर्देशित किया है.
आयुष्मान खुराना स्टारर आर्टिकल 15 भी जात-पात के भेदभाव के चलते हुए अपराध पर बेस्ड है. बदायूं हत्याकांड पर आधारित, आर्टिकल 15 पुलिस विभागों और सरकारी निकायों के भीतर सिस्टमैटिक भ्रष्टाचार का विश्लेषण करती है, क्योंकि अधिकारी निचली जाति की तीन किशोर लड़कियों के गैंग रेप और हत्या को छुपाते हैं. इस फिल्म को ओटीटी के प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स पर गेख सकते हैं.
फिल्म मसान में ऊंची जाति और नीची जाति के लड़का-लड़की की प्रेम कहानी दिखाई गई है. फिल्म में विक्की कौशल ने छोटी जाति के लड़के का किरदार निभाया है जो शमशान में लाशों को जलाता है. वह एक ऊंची जाति की लड़की से प्यार कर बैठता है. फिल्म में ऋचा चड्ढा की भी एक कहानी है.
फिल्म मुक्काबाज में एक दलित जाति के लड़के की कहानी दिखाई गई है जिसे खेलकूद में जातिगत भेदभाव झेलना पड़ता है. फिल्म में विनीत कुमार सिंह ने अहम रोल प्ले किया है.
धनुष स्टारर फिल्म कर्णन साल 2021 में रिलीज हुई थी. इस मूवी में साउथ में जातिगत भेदभाव की कहान को उजागर किया गया . फिल्म में धनुष ने एक दलित का रोल प्ले किया है.
साल 2011 में आई फिल्म आरक्षण में सैफ अली खान, दीपिका पादुकोण और अमिताभ बच्च ने अहम रोल प्ले किया था. ये फिल्म ए सोशल-पॉलिटिकल ड्रामा फिल्म हैं. इसमें देश में जाति-भेदभाव पर बंटे लोग और और आरक्षण जैसे मुद्दे को उठाया गया है.