Demat Insurance: बीमा पॉलिसी के डिजिटल होने के ये हैं बड़े फायदे, बैंक से कर्ज लेना होगा आसान
डीमैट फॉर्मेट का मतलब है ओरिजनल दस्तावेजों को डिजिटल फार्मेट में तब्दील करना. इसके अलावा, इरडा (IRDA) ने सभी इंश्योरेंस कंपनियों को मौजूदा और पुरानी पॉलिसियों को अगले साल दिसंबर तक यानी दिसंबर 2023 तक डिजिटल फार्मेट में बदलने को कहा है.
इंश्योरेंस कंपनियां इस बदलाव पर होने वाले खर्च वहन करेंगी. इसके तहत सभी पुराने और हालिया पेपर-बेस्ड इंश्योरेंस पॉलिसी धारकों के दस्तावेजों को डिजिटल फार्मेट में किया जाएगा. इंश्योरेंस पॉलिसी धारकों को इसके लिए किसी तरह की फीस नहीं देनी होगी. इंश्योरेंस रेगुलेटर IRDAI चाहता है कि जिस तरह से किसी शख्स के ट्रेडिंग अकाउंट को डीमैट फार्मेट में शेयरों को रखा जाता है. ठीक उसी तर्ज पर इंश्योरेंस पॉलिसी धारकों के दस्तावेजों को डीमैट फार्मेट में रखा जाएगा.
डीमैट फॉर्मेट सभी इंश्योरेंस पॉलिसी को डिजिटल बनाने की एक पहल है. इस डीमैट फार्मेट के तहत इंश्योरेंस पॉलिसीधारकों को अपनी बीमा का एक पोर्टफोलियो बनाने की इजाजत होगी. साथ ही ये बीमा पॉलिसीधारकों को सुरक्षित इंश्योरेंस रिपॉजिटरी डिजिटल फार्मेंट में रखने की अनुमति देता है. ऐसे में अब पॉलिसीधारकों के पास केवल एक ई-इंश्योरेंस अकाउंट (eIA) होगा. जिसमें वह अपने सभी इंश्योरेंस पॉलिसियों को अपनी पसंद के इंश्योरेंस रिपॉजिटरी में एक साथ रख सकते हैं.
4 इंश्योरेंस रिपॉजिटरीज डीमैट फॉर्मेट की सर्विस मुहैया करा रहे हैं- 1 नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (NSDL), 2 सेन्ट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज लिमिटेड (CDSL), 3 कार्वी इंश्योरेंस रिपॉजिटरी लिमिटेड (Karvy Insurance Repository Ltd) और 4 सीएएमएस इंश्योरेंस रिपॉजिटरी सर्विसेज लिमिटेड (CAMS Insurance Repository Services Ltd) हैं.
ये सभी पॉलिसीधारकों को ई-इंश्योरेंस अकाउंट (eIA) देने का काम करते हैं. बीमा धारक इसमें अपने सभी हेल्थ इंश्योरेंस, व्हीकल इंश्योरेंस, लाइफ इंश्योरेंस सुरक्षित रख सकते हैं. इन इंश्योरेंस रिपॉजिटरीज ने 1 करोड़ से अधिक पॉलिसीधारकों को इलेक्ट्रॉनिक इश्यूएंस (electronic issuance), स्टोरेज और सर्विसज में मदद की है. इसके अलावा, इरडा ने पॉलिसी बेचने, सेवा देने और निपटाने के लिए बीमा सुगम (Bima Sugam) नाम से एक डिजिटल प्लेटफॉर्म का मसौदा भी पेश किया है.
इंश्योरेंस पॉलिसी के डीमैट फॉर्मेट की प्रक्रिया शेयर्स के डीमैट फॉर्मेट से मिलती जुलती है. हालांकि शेयर्स के डीमैट फॉर्मेट में डीमैट अकाउंट से शेयरधारकों को शेयर खरीदने और बेचने की अनुमति होती है, जबकि इंश्योरेंस पॉलिसीधारको को इस नए डीमैट फॉर्मेट से इस तरह की सुविधा नहीं होगी.
डीमैट इंश्योरेंस अकाउंट पॉलिसीधारक को उनके सभी लाइफ, व्हीकल, हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी को देखने की इजाजत होगी. डीमैट इंश्योरेंस अकाउंट में सभी प्रकार की इंश्योरेंस पॉलिसियों का ट्रांजेक्शन और दस्तावेज़ और संबंधित जानकारी एक ही स्थान पर स्टोर होगी और पॉलिसीधारक के पास अपने डीमैट इंश्योरेंस अकाउंट यानी ई- इंश्योरेंस अकाउंट में पॉलिसी शुरू होने की तारीख, परिपक्वता स्थिति, नामांकन, पता, नियम और शर्तों के बारे में जानकारी होगी.
इंश्योरेंस पॉलिसी की सभी डिटेल डिजिटल हो जाने से बैंक आपकी पॉलिसी के मुताबिक लोन जारी करने के लिए राजी हो सकेंगे. यानी लोन लेना आसान हो जाएगा. साथ ही डीमैट फॉर्मेट लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसियों के लिए एक सेकेंडरी मार्केट तैयार करने में मदद कर सकता है, जैसा कि विकसित देशों में हो रहा है. पॉलिसी धारक अपने इंश्योरेंस को मैच्योर होने से पहले अपनी पॉलिसी को बेच सकता है.