कार का स्टेपनी टायर छोटा क्यों होता है? वजह जानकर चौंक जाएंगे

जब हम कार में पंचर होने पर बूट स्पेस खोलते हैं तो अक्सर नीचे रखी हुई स्टेपनी बाकी चारों पहियों से काफी छोटी और पतली दिखाई देती है. पहली नजर में यह थोड़ा अजीब ज़रूर लगता है. लेकिन कार कंपनियां इसे जानबूझकर इसी साइज का बनाती हैं. चलिए जानतें हैं कि आखिर कार निर्माता कंपनियां रेगुलर टायर की जगह यह छोटा सा डोनट टायर देने के पीछे की वजह क्या होती है.
आजकल की कारों को अंदर से ज्यादा से ज्यादा केबिन स्पेस और बूट स्पेस देने के हिसाब से डिजाइन किया जाता है. अगर कार के पीछे बिल्कुल वैसा ही भारी-भरकम और चौड़ा टायर रखा जाएगा तो वह बूट स्पेस का एक बहुत बड़ा हिस्सा घेर लेगा. छोटा और पतला स्टेपनी टायर ट्रंक के निचले हिस्से में बनी छोटी सी जगह में बहुत आसानी से फिट हो जाता है. जिससे आपका सामान रखने का पूरा स्पेस खाली बना रहता है.
बता दें कि एक रेगुलर साइज का अलॉय व्हील या बड़ा टायर काफी भारी होता है. कार में फालतू वजन बढ़ाना सीधे तौर पर गाड़ी की फ्यूल एफिशिएंसी यानी माइलेज पर असर डालता है. छोटा स्टेपनी टायर हल्का होता है जिससे कार का कुल वजन कम रहता है. हल्का व्हील होने की वजह से कार को ज्यादा ताकत नहीं लगानी पड़ती और डेली के सफर में पेट्रोल-डीजल की भी अच्छी-खासी बचत हो जाती है.
वहीं अगर कंपनी हर कार के साथ एक बिल्कुल वैसा ही प्रीमियम अलॉय व्हील या बड़ा टायर दे तो कार की ओवरऑल कीमत काफी बढ़ जाएगी. छोटे साइज का स्पेयर व्हील देने से कंपनियों की प्रोडक्शन कॉस्ट घटती है. जिसका फायदा ग्राहकों को कार की ऑन-रोड कीमत थोड़ी कम मिलने के रूप में भी नजर आता है.
जबकि कंपनी इस बात को बहुत अच्छे से जानती है कि लोग अक्सर आलस में स्टेपनी बदलकर महीनों तक उसी पर गाड़ी चलाते रहते हैं. छोटे और पतले टायर को इस तरह बनाया जाता है कि आप उसे देखकर समझ जाएं कि यह केवल इमरजेंसी के लिए है.
अक्सर देखा जाता है कि बीच रास्ते में अचानक टायर पंचर हो जाना किसी सिरदर्द से कम नहीं होता. ऐसे में अगर आपको भारी-भरकम बड़ा पहिया उठाकर लगाना पड़े तो पसीने छूट जाते हैं. छोटा डोनट टायर काफी हल्का होता है. जिसे कोई भी अकेला इंसान बिना किसी की मदद के जैक लगाकर बहुत आसानी से बदल सकता है. यह इमरजेंसी के समय शारीरिक मेहनत को काफी हद तक कम कर देता है.
जबकि छोटे स्पेयर टायर पर आमतौर पर 80 km/h की स्पीड लिमिट लिखी होती है. पतला होने की वजह से इसकी ग्रिप और ग्राइंडिंग रेगुलर टायर जैसी नहीं होती. कंपनियां इसे ऐसा इसलिए बनाती हैं ताकि ड्राइवर ओवरस्पीडिंग न करे और सतर्क होकर गाड़ी चलाए. अगर आप इसे लगाकर तेज रफ्तार में गाड़ी भगाएंगे तो कार का बैलेंस बिगड़ने का खतरा रहता है.
ऐसा देखा जा रहा कि आजकल ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री बहुत तेजी से बदल रही है. कई प्रीमियम कारों में तो अब स्टेपनी देना ही बंद कर दिया गया है. इसकी जगह कंपनियां रन-फ्लैट टायर्स या फिर पंचर रिपेयर किट देने लगी हैं. ऐसे में जो कारें अभी भी स्टेपनी के साथ आ रही हैं उनमें जगह बचाने के लिए डोनट टायर ही सबसे सही और टिकाऊ ऑप्शन माना जाता है.
अगर कभी रास्ते में आपकी कार पंचर हो जाए और आपको स्टेपनी लगानी पड़े तो उसे लगाकर लंबी दूरी तय करने की भूल कभी न करें. जैसे ही आपको पहला पंचर वाला या टायर रिपेयर सेंटर दिखे तुरंत अपने असली टायर को ठीक करवाकर वापस जगह पर लगवा लें. छोटी स्टेपनी को वापस बूट स्पेस में लगाकर रख दें ताकि अगली किसी इमरजेंसी में यह आपके काम आ सके.