कार में ये फीचर्स होते हैं सिर्फ दिखावा, खरीदने से पहले जानें

जब भी हम नई कार खरीदने शोरूम जाते हैं तो शोरूम के सेल्सपर्सन हमें कई तरह के फैंसी फीचर्स गिनाने लगता है. ब्रोशर देखकर ऐसा लगता है कि ये सारी आधुनिक चीजें हमारी ड्राइविंग लाइफ को एकदम बदल देंगी. लेकिन सच तो यह है कि इनमें से कई फीचर्स सिर्फ कागजों पर अच्छे लगते हैं और असल जिंदगी में उनका इस्तेमाल शायद ही कभी होता है. इसलिए यह जानना बहुत जरूरी है कि कौन-कौन से फीचर्स सिर्फ दिखावा होते हैं.
नई कार में दिखावटी फीचर्स की लिस्ट में सबसे पहला नाम सनरूफ का आता है. भारत के मौसम को देखते हुए साल के ज्यादातर महीनों में इतनी गर्मी या प्रदूषण रहता है कि आप गाड़ी का शीशा तक नीचे नहीं कर सकते. इसके बावजूद लोग सनरूफ के नाम पर लाखों रुपये एक्स्ट्रा चुकाते हैं. जबकि देश की तेज धूप और धूल भरी हवाओं के कारण इसका इस्तेमाल साल में मुश्किल से एक या दो बार ही हो पाता है.
जबकि कार के अंदर मिलने वाली एम्बिएंट लाइटिंग भी इसी लिस्ट में शामिल है. तरह-तरह के रंगों वाली यह लाइट्स रात के वक्त केबिन को किसी क्लब जैसा लुक तो जरूर देती हैं लेकिन ड्राइविंग के दौरान इनका कोई खास इस्तेमाल नहीं होता है. यह सिर्फ देखने में थोड़ी फैंसी लगती है लेकिन असल सफर के दौरान इसका ड्राइवर या पैसेंजर्स के कंफर्ट से दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं होता है.
ऐसा देखा जाता है कि आजकल कई कारों में टचस्क्रीन क्लाइमेट कंट्रोल या पूरी तरह से टच-सेंसिटिव डैशबोर्ड दिए जाने लगे हैं. दिखने में यह बहुत फ्यूचरिस्टिक और मॉडर्न लगते हैं. लेकिन गाड़ी चलाते वक्त इन्हें ऑपरेट करना काफी खतरनाक हो सकता है. फिजिकल बटन्स या नॉब की तरह आप बिना देखे इन्हें छूकर इस्तेमाल नहीं कर सकते जिससे बार-बार आपका ध्यान सड़क से भटक जाता है और दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है.
कार के डैशबोर्ड और दरवाजों पर मिलने वाली पियानो ब्लैक फिनिश भी बड़े काम की चीज नहीं है. शोरूम में चमकती हुई यह फिनिश पहली नजर में दिल जीत लेती है लेकिन असली परेशानी तब शुरू होती है जब गाड़ी सड़क पर चलती है. इस पर उंगलियों के निशान, धूल और हल्के खरोंच इतनी आसानी से पड़ जाते हैं कि इसे हर दूसरे दिन साफ करना पड़ता है जो एक बड़ा सिरदर्द बन जाता है.
जबकि इसके अलावा वेंटिलेटेड सीट्स हमारे देश के गर्म मौसम के लिए कुछ हद तक ठीक लग सकती हैं. लेकिन कई सस्ती या मिड-रेंज कारों में जो कूलिंग सीट्स आती हैं. उनका परफॉर्मेंस बहुत औसत होता है. एसी की ठंडक वैसे ही पूरे केबिन को संभाल लेती है. ऐसे में इस खास फीचर के लिए भारी-भरकम कीमत चुकाना समझदारी का सौदा नहीं है. कई बार बेसिक एसी ही इस काम को ज्यादा बेहतर ढंग से कर देता है.
वहीं कार के पिछले हिस्से में मिलने वाली टचस्क्रीन डिस्प्ले या रियर सीट एंटरटेनमेंट स्क्रीन भी ज्यादातर समय खाली ही रहती है. आज के दौर में हर किसी के हाथ में स्मार्टफोन और टैबलेट्स होते हैं. जिन पर लोग अपनी पसंद की चीजें देखना पसंद करते हैं. कार की फिक्स स्क्रीन पर पैसे खर्च करने का कोई खास फायदा नहीं मिलता. क्योंकि बच्चे या पैसेंजर लंबे सफर में भी मोबाइल का ही इस्तेमाल करते हैं.
जबकि कार में जेस्चर कंट्रोल वाला फीचर भी एक पब्लिसिटी स्टंट से ज्यादा कुछ नहीं है. कई बार यह सेंसर सही से काम नहीं करते हैं और आपको मजबूरन बटन या स्टीयरिंग माउंटेड कंट्रोल्स का ही इस्तेमाल करना पड़ता है. जब सिंपल बटन से काम आसानी से हो जाता है तो ऐसे महंगे और जटिल फीचर्स के पीछे भागने का कोई मतलब नहीं बनता है.
इसलिए कार खरीदते वक्त हमेशा अपनी असल जरूरतों को प्राथमिकता देनी चाहिए न कि ट्रेंड्स को. जो फीचर्स आपके रोजमर्रा के सफर को आसान बनाते हैं. जैसे कि अच्छा म्यूजिक सिस्टम, पावर स्टीयरिंग और मजबूत सेफ्टी सिर्फ उन्हीं पर पैसा लगाएं. इन दिखावटी और फालतू फीचर्स से बचकर आप आसानी से हजारों-लाखों रुपये बचा सकते हैं और एक सही तथा प्रैक्टिकल गाड़ी अपने घर ला सकते हैं.