Car Servicing Tips: कार की सर्विसिंग में क्या-क्या बदलना जरूरी होता है? ज्यादातर लोग नहीं जानते

हर कोई चाहता है कि उसकी कार बीच रास्ते में धोखा न दे. ऐसे में अगर आपके पास कार है तो उसकी समय-समय पर सर्विस कराना बहुत जरूरी हो जाता है. ऐसे में अक्सर लोग गाड़ी की सर्विसिंग करवाकर घर आते हैं और सोचते हैं कि अब सब ठीक हो गया. लेकिन कुछ ही दिनों में गाड़ी फिर से परेशान करने लगती है और एक बार फिर उसे ठीक करवाने मैकेनिक के पास जाना पड़ता है. इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि सर्विसिंग के समय हमें पता ही नहीं होता कि गाड़ी में क्या-क्या बदलना या चेक करवाना जरूरी है. हम बस मैकेनिक पर भरोसा कर देते हैं और वो जो कहे, मान लेते हैं. ऐसे में ये जरूरी हो जाता है ये जानना की आपको कार में क्या-क्या बदलना चाहिए.
इंजन ऑयल गाड़ी की जान होता है. यह इंजन के सभी पुर्जों को घिसने से बचाता है और गाड़ी को स्मूद चलाता है. ध्यान रखें हर सर्विसिंग पर इंजन ऑयल जरूर बदलवाएं. आमतौर पर हर 5,000 से 10,000 किलोमीटर पर या हर 6 महीने में एक बार इंजन ऑयल बदलना चाहिए. इसके साथ ऑयल फिल्टर भी बदलवाएं, क्योंकि पुराना फिल्टर नए ऑयल को भी खराब कर सकता है.
एयर फिल्टर का काम इंजन में जाने वाली हवा को साफ करना होता है. अगर यह जाम हो जाए तो गाड़ी का माइलेज कम हो जाता है और इंजन पर भी जोर पड़ता है. हर 15,000 से 20,000 किलोमीटर पर एयर फिल्टर को जरूर चेक करवाएं और जरूरत पड़े तो उसे बदलवाएं. यह बहुत सस्ता पुर्जा होता है लेकिन इसका असर पूरी गाड़ी पर पड़ता है.
ब्रेक की बात करें तो यह सीधे आपकी और आपके परिवार की सुरक्षा से जुड़ा है. सर्विसिंग के समय ब्रेक पैड्स की मोटाई जरूर चेक करवाएं. अगर वो घिस गए हों तो तुरंत बदलवा दें. इसके साथ ब्रेक ऑयल का लेवल भी देखें. अगर ब्रेक दबाने पर आवाज आती है या गाड़ी रुकने में ज्यादा समय लग रहा है, तो यह खतरे की निशानी हो सकती है, इसे बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
सर्विसिंग के दौरान टायरों की भी अच्छे से जांच होनी चाहिए. इसमें टायर का प्रेशर सही है या नहीं, टायर घिसा हुआ तो नहीं है, कहीं कट या दरार तो नहीं यह सब देखकर सही करवाना जरूरी है. इसके साथ टायर रोटेशन भी करवाएं यानी आगे-पीछे के टायर बदलवाएं, इससे सभी टायर बराबर घिसते हैं और लंबे समय तक चलते हैं. क्योंकि अगर सही टायर प्रेशर रहेगा तो माइलेज भी अच्छा मिलता है.
गाड़ी का इंजन गर्म न हो, इसके लिए कूलेंट का सही लेवल होना बहुत जरूरी है. खासकर गर्मियों में कूलेंट कम हो जाए तो गाड़ी ओवरहीट हो सकती है. सर्विसिंग पर कूलेंट का लेवल और उसकी क्वालिटी जरूर चेक करवाएं. साथ ही बैटरी टर्मिनल साफ है या नहीं, बैटरी कमजोर तो नहीं हो रही यह भी देखें. बैटरी खराब होने से गाड़ी अचानक बंद हो सकती है.
इसके अलावा स्पार्क प्लग इंजन की भी जांच करवाएं क्योंकि ये स्टार्ट करने में मदद करता है. वहीं अगर यह खराब हो तो गाड़ी का माइलेज कम हो जाता है और इंजन भी सही से काम नहीं करता. हर 30,000 से 40,000 किलोमीटर पर स्पार्क प्लग जरूर बदलवाएं. इसी तरह वाइपर ब्लेड को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. इसका असर आपको बरसात में देखने को मिल सकता है खराब वाइपर ब्लेड होने से देखने में परेशानी होती है जो एक्सीडेंट का कारण बन सकती है.
कई बार मैकेनिक ऐसी चीजें बदलने की सलाह देते हैं जिनकी असल में जरूरत भी नहीं होती. और कई बार ऐसा होता है कि सर्विस के पूरे पैसे देने के बाद भी गाड़ी की सही तरह से सर्विस नहीं होती. इसलिए जब भी सर्विसिंग करवाने जाए उससे पहले खुद को भी थोड़ी जानकारी होनी चाहिए. साथ ही पुराने पुर्जे वापस मांगें ताकि आपको पता चले कि वाकई बदले गए हैं या नहीं. सर्विसिंग का पूरा बिल लें और उसमें हर चीज को ध्यान से पढ़ें. कई बार मैकेनिक उन चीजों का दाम भी जोड़ देते हैं जिसको उन्होंने ठीक भी नहीं किया होता है, ऐसे में आपको पता रहना चाहिए और जो काम न करवाया हो उसका पैसा नहीं देना चाहिए. थोड़ी सी सतर्कता आपके हजारों रुपए बचा सकती है और गाड़ी भी लंबे समय तक अच्छी रहती है.