Mango Ban: विदेश भेजने से पहले आम का कौन सा टेस्ट होता है, फेल हो जाए तो एक्सपोर्ट पर लगा जाता है बैन

Mango Ban: इंटरनेशनल मार्केट में भारतीय आमों की काफी ज्यादा मांग है. लेकिन उन्हें एक्सपोर्ट करना सिर्फ फल को पैक करके भेजना जितना आसान नहीं है. हाल ही में जापान और नेपाल ने भारत के आमों पर प्रतिबंध लगा दिया है. इसकी वजह भारतीय ट्रीटमेंट सेंटर में फ्यूमिगेशन और साफ सफाई में गंभीर कमी थी. इसी बीच आइए जानते हैं कि विदेश में दुकानों तक पहुंचने से पहले आम को किस टेस्ट से गुजरना पड़ता है.
एक्सपोर्ट से पहले आमों का फाइटोसैनिटरी टेस्ट होता है. इसमें हानिकारक कीड़ों, फंगस, बैक्टीरिया और पौधों की बीमारियों की जांच की जाती है. यह टेस्ट पक्का करता है कि एक्सपोर्ट किए गए फल से इंपोर्ट करने वाले देश की खेती या फिर पर्यावरण को कोई खतरा न हो.
सभी टेस्ट सफलतापूर्वक पास करने के बाद एक्सपोर्टर्स को कृषि मंत्रालय से फाइटोसैनिटरी सर्टिफिकेट मिलता है. इस डॉक्यूमेंट के बिना आमों की खेप को कानूनी रूप से इंटरनेशनल मार्केट में नहीं भेजा जा सकता.
जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों के लिए आमों को वेपर हीट ट्रीटमेंट से गुजरना पड़ता है. गर्म भाप का इस्तेमाल फ्रूट फ्लाई के अंडों और लार्वा को खत्म करने के लिए किया जाता है. यह इंपोर्ट करने वाले देशों के लिए सबसे बड़ी चिंताओं में से एक है.
कई यूरोपीय देशों में हॉट वॉटर ट्रीटमेंट की जरूरत होती है. इसमें आमों को एक खास तापमान वाले पानी में धोया जाता है. यह प्रक्रिया कीड़ों को खत्म करने और इंटरनेशनल क्वॉरेंटाइन स्टैंडर्ड का पालन बेहतर बनाने में मदद करती है.
अमेरिका जैसी जगहों के लिए आमों को कंट्रोल गामा रेडिएशन के संपर्क में लाया जाता है. यह ट्रीटमेंट फल पर हानिकारक अंश छोड़े बिना सूक्ष्मजीवों और कीड़ों को खत्म कर देता है.
अगर आम पेस्टिसाइड के अंशों के टेस्ट में फेल हो जाते हैं, साफ सफाई के स्टैंडर्ड खराब होते हैं या फिर ट्रीटमेंट की जरूरत को पूरा नहीं करते हैं तो इंपोर्ट करने वाले देश खेप को रिजेक्ट कर सकते हैं या फिर अस्थायी बैन लगा सकते हैं.