Vrishabh Sankranti 2026: वृषभ संक्रांति पर दुर्लभ संयोग, दुख-दरिद्रता से मुक्ति पाने का मौका, कर लें ये खास काम

वृषभ संक्रांति 2026
वृषभ संक्रांति 15 मई 2026 को है. इस दिन सूर्य सुबह 6.28 पर ही वृषभ राशि में प्रवेश कर जाएंगे. साथ ही इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है, जो सारे कार्य पूर्ण करने में सहायक है. ऐसे में संक्रांति की सुबह पुण्य काल में कुछ खास मंत्रों का जाप आपके जीवन में बदलाव ला सकता है. इस दिन पुण्य काल सुबह 5.30 से सुबह 6.28 तक है.
ॐ ह्रीं रवये नमः - वृषभ संक्रांति पर प्रातःकाल सूर्य देव के सम्मुख इस मंत्र का श्रद्धापूर्वक जप करने से शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. यह रक्त प्रवाह को संतुलित रखने में सहायक माना गया है तथा सर्दी, कफ और कमजोरी से जुड़े कष्टों को कम करने की मान्यता है.
ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः - सूर्य को जल अर्पित करते समय इस मंत्र का उच्चारण बेहद शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे व्यक्ति के जीवन में मान-सम्मान, सुख-समृद्धि और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है तथा नकारात्मकता दूर होती है.
ॐ ह्रां भानवे नमः - वैसे तो सूर्य मंत्र रोजाना पढ़ना चाहिए, लेकिन संक्रांति के दिन इस मंत्र का जाप शरीर में नई स्फूर्ति और तेज बढ़ता है.
ॐ आदित्याय नमः- संक्रांति के दिन इस मंत्र का जाप व्यक्ति की निर्णय क्षमता और मानसिक एकाग्रता को बढ़ाने वाला माना गया है. इसके प्रभाव से व्यक्तित्व में आकर्षण आता है और कार्यक्षेत्र में उन्नति के अवसर बढ़ते हैं.
ॐ मरीचये नमः - धार्मिक मान्यता है कि संक्रांति पर इस मंत्र के जप से तन और मन दोनों में सकारात्मकता बनी रहती है. धार्मिक मान्यता है कि यह रोगों से रक्षा करने, चेहरे की आभा बढ़ाने और शरीर को निरोग बनाए रखने में सहायक होता है.