घर की रोशनी बदलते ही बदल सकता है मूड और नींद! जानिए वास्तु के हिसाब से सही लाइटिंग का तरीका?
वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर में रोशनी वो जीवन शक्ति है, जो वातावरण की ऊर्जाओं को प्रभावित करने का काम करता है. आंतिरक सजावट में प्रयुक्त प्रकाश व्यवस्था मनोदशा, सेहत, संबंध, नीद की गुणवत्ता और आर्थिक स्थिरता को प्रभावित कर सकती है. यही वजह है कि, वास्तु शास्त्र में प्रत्येक स्थान पर उपयुक्त तरह की रोशनी के प्रयोग पर खास जोर दिया गया है.
वास्तु विशेषज्ञों के मुताबिक, सुनियोजित प्रकाश व्यवस्था करीब 80 प्रतिशत घरों में ऊर्जा प्रवाह और भावनात्मक संतुलन को बढ़ाने का काम करती है. गर्म और ठंडी दोनों ही तरह की रोशनी जरूरी है, और उनकी स्थिति घर में सामंजस्य को प्रभाविक करती है.
गर्म और ठंडी रोशनी के फायदों को जानने और विभिन्न तरह की रोशनी का इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है? यह जानना बेहद जरूरी है, जिससे एक संतुलन और शांत रहने का वातावरण बनता है. वास्तु शास्त्र के अनुसार गर्भ रोशनी के सूर्य से जुड़ी होती है, जो गर्माहट, स्थिरता और भावनात्मक संतुलन का प्रतीक है.
वास्तु शास्त्र में गर्म रोशनी तंत्रिका तंत्र को सुकून देने के साथ तनाव से मुक्ति दिलाती है. गर्म रोशनी लगाने के लिए सबसे अच्छी जगह बेडरूम या लिविंग रूम हैं. ये घर के वे हिस्से हैं जहां लोग आराम करते हैं और परिवार के साथ अधिक समय बिताते हैं. वास्तु विशेषज्ञ आमतौर पर इन गर्म रोशनी वाली बत्तियों को दक्षिण-पश्चिम और दक्षिण दिशाओं में लगाने की सलाह देते हैं.
वास्तु शास्त्र के अनुसार, ठंडी रोशनी का संबंध चंद्रमा और बुध ग्रह से जुड़ा होता है. वे मानसिक स्पष्टता और सतर्कता का प्रतिनिधित्व करते हैं. ठंडी रोशनी का इस्तेमाल अध्ययन कक्ष, होम ऑफिस, रसोई या बाथरूम में करना चाहिए.