भारत के 9 शक्तिशाली नवग्रह मंदिर: जहां सूर्य से लेकर राहु-केतु ग्रह दोष तक होते हैं शांत!
कुंराथुर श्री नागेश्वर राहु को समर्पित मंदिर है जो 800 साल पुराना मंदिर है, जिसे कवि और भक्त श्री सेक्किझार द्वार बनाया गया था. इसमें श्री नागेश्वर और देवी श्री कामाक्षी की प्रतिमाएं विराजमान हैं. भक्त राहु से जुड़ी समस्याओं के निवारण के लिए यहां आते हैं.
गेरुगमबक्कम श्री नीलकंडेश्वर केतु को समर्पित मंदिर है, जहां भक्त केतु दोष से मुक्ति पाने के लिए इस मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं. चोल काल में निर्मित यह मंदिर विदेशी आक्रमणों की वजह से अधूरा ही रह गया. यहां के मुख्य देवता श्री नीलकंदेश्वर और देवी श्री आदि कामाक्षी हैं.
पोझिचलूर श्री अगाथेश्वर चोल काल से जुड़ा शनि मंदिर है. यह मंदिर उन भक्तों के लिए काफी महत्व रखता है, जो जीवन में कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं. यहां के मुख्य देवता श्री अगस्त्येश्वर और श्री आनंदवल्ली है. पौराणिक कहानियों के अनुसार ऋषि अगस्त्य और श्री शनिश्वर भगवान ने शिव की पूजा की थी. पोलिचलूर मेन रोड, अय्यप्पन नगर, नेहरू नगर, पॉझिचलूर, चेन्नई, तमिलनाडु में है.
मंगडु श्री वेल्लीश्वरर श्री शुक्रन को समर्पित मंदिर है. यहां की मूर्ति अत्यंत सूक्ष्मता से तराशी गई है और देखने में काफी खुबसूरत है, जो धन और प्रतिष्ठा की प्राप्ति के लिए आशीर्वाद प्राप्त करने वाले भक्तों को आकर्षित करती है. यह मंदिर टीएसवी कोइल स्ट्रीट, शंकरपुरम, मायलापुर, चेन्नई, तमिलनाडु में है.
पोरुर श्री रमणाधेश्वर मंदिर जो गुरु ग्रह को समर्पित मंदिर है. इस मंदिर का संबंध रामायण काल से है. लंका जाते वक्त पोरूर में विश्राम करते हुए भगवान राम के पैर गलती से एक शिवलिंग पर पड़ गए थे. प्रायश्चित के लिए उन्होंने चार दिन की कठिन तपस्या की थी, जिससे भगवान शिव प्रसन्न हुए और उन्होंने विश्वरूप दर्शन प्राप्त हुए. मंदिर में श्री रामनादेश्वरार की एक विशाल और सुंदर प्रतिमा स्थापित है. यह मंदिर ईश्वरन कोइल सेंट, आरई नगर, पोरूर, चेन्नई तमिलनाडु में है.
कोवूर श्री सुंदरेश्वर श्री बुधन मंदिर जिसे सातवीं शताब्दी में चोल काल के दौरान बनाया गया था. इस मंदिर में श्री सुंदरेश्वर और श्री सौंदरांबिगई विराजमान हैं. पौराणिक कथा के मुताबिक, भगवान शिव से शादी करने के लिए देवी कामक्षी ने कठिन तपस्या की थी, जिस कारण पृथ्वी का तापमान बढ़ गया था, और देवी महालक्ष्मी ने उन्हें जागृत करने के लिए प्रार्थना की थी. यह मंदिर एन माडा, कोवूर, चेन्नई, तमिलनाडु में स्थित है.
पूंधमल्ली श्री वैधेश्वर मंदिर जो एक हजार साल पुराना मंदिर मंगल को समर्पित है. यहां आने वाले भक्त एक नक्काशीदार ताड़ के पेड़ के नीचे श्री अंगारगन के पदचिह्न देख सकते हैं. मुख्य देवता श्री वैद्येश्वर और श्री थाय्यल नायगी है. मंदिर की जटिल नक्काशी और वास्तुकला उत्कृष्ट शिल्प कौशल को दर्शाती है. मंदिर में भगवान शिव की पूजा लिंगम के रूप में की जाती है. यह सुंदर नगर, पूनामल्ली, चेन्नई तमिलनाडु में स्थित है.
सोमंगलम श्री सोमनाधीश्वर मंदिर चंद्रमा देवता को समर्पित है, जिसकी स्थापना 1073 ईस्वी में हुई थी. पौराणिक कथा के मुताबिक, दक्ष द्वारा शाप दिए जाने के बाद चंद्र (चंद्रमा देवता) ने अपनी दिव्य शक्तियां खो दीं. उन्होंने एक तालाब बनाया और सालों तक भगवान शिव की पूजा की, जिससे उन्हें अपनी शक्तियां और सौंदर्य पुनः प्राप्त हो गए. मंदिर के भीतर भगवान शिव नटराज के दुर्लभ रूप में चतुर तांडव मूर्ति के रूप में विराजमान हैं. यह कांचीपुरम तमिलनाडु में स्थित है.
सूर्य देव को समर्पित कोलप्पाक्कम श्री अगाथेश्वर जिसे (श्री सूर्यन के लिए नवग्रह स्थलम) मंदिर 1300 साल से भी ज्यादा पुराना है. पौराणिक कथाओं के मुताबिक, ऋषि अगस्त्य और सूर्य देव दोनों ने ही यहां पर भगवान शिव की पूजा की थी, इसलिए इस मंदिर का नाम श्री अगस्त्येश्वर मंदिर पड़ा. यहां के मुख्य देवता श्री अगस्त्येश्वर और श्री आनंदवल्ली हैं. हैरानी की बात ये है कि, इस मंदिर के सभी मंदिर भगवान शिव के मुख्य मंदिर की ओर मुख किए हुए हैं.