Som Pradosh Vrat 2026: सोम प्रदोष व्रत पर करें शिवलिंग जलाभिषेक, लेकिन इन गलतियों से बचें

सोम प्रदोष व्रत शिवलिंग जलाभिषेत
चैत्र महीने के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर आज प्रदोष व्रत है. सोमवार का दिन होने से इसे सोम प्रदोष व्रत कहा जाएगा. प्रदोष व्रत के दिन प्रदोष काल में पूजा करने का विशेष महत्व है.
सोम प्रदोष व्रत पर आज पूजा के लिए शाम 06.37 से रात 08.44 तक शुभ मुहूर्त रहेगा. आप मंदिर या घर कहीं भी भगवान शिव की पूजा और जलाभिषेक कर सकते हैं. हालांकि शिवालय में जलाभिषेक करना सर्वोत्तम होता है.
प्रदोष व्रत का दिन भगवान शिव की पूजा के लिए समर्पित है. शास्त्रों के अनुसार, प्रदोष व्रत पर शिवलिंग का जलाभिषेक करने से महादेव प्रसन्न होते हैं. लेकिन जलाभिषेक के दौरान कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए.
शिवलिंग पर खड़े होकर जल चढ़ाने के बजाय स्थिर होकर बैठ जाएं और धीरे-धीरे जल चढ़ाएं. जल चढ़ाते समय ध्यान रखें कि आपका मुख उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए.
शिवलिंग पर जलाभिषेक के लिए परंपरा के अनुसार, तांबा, पीतल या चांदी धातु के बर्तन या कलश को अधिक शुभ माना जाता है. लेकिन प्लास्टिक, लोहा या स्टील-एल्युमिनियम के पात्र से शिवलिंग पर कभी भी जल नहीं चढ़ाना चाहिए.
प्रदोष व्रत पर शिवलिंग पर जलाभिषेक करने के बाद तीन बार ताली जरूर बजानी चाहिए. पहली ताली का अर्थ शिवालय में उपस्थिति को दर्शाती है, दूसरी ताली शिवजी का आशीर्वाद पाना होता है और तीसरी ताली बजाने का अर्थ है कि, हम भगवान से दुख-पीड़ा समाप्त करने की विनती करते हैं.