Shani Dev: शनि देव का प्रिय मंत्र है ये, इसके जाप से दूर होते हैं साढ़ेसाती और ढैय्या के दुष्प्रभाव
ऊँ नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्।छायामार्तण्डसम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्। - ये शनि देव का प्रिय मंत्र कहलाता है. मान्यता है कि रोजाना, खासकर शनिवार के दिन 108 बार इसके जाप से शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या के अशुभ प्रभाव में कमी आती है. धन की परेशानी दूर होती है.
ऊँ शन्नो देवीरभिष्टडआपो भवन्तुपीतये। - शनि दोष निवारण के लिए ये मंत्र बेहद फलदायी माना गया है. शनि देव के समक्ष इसका एक माला जाप करने से व्यापार-नौकरी में आ रही समस्या खत्म होती है.
ॐ शन्नोदेवीरभिष्टय आपो भवन्तु पीतये।शंयोरभिश्रवन्तु नः। ऊँ शं शनैश्चराय नमः। - जिन लोगों पर शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या चल रही है वह निरंतर इस मंत्र का जाप करते हुए शनि देव की पूजा करें. ऐसा करने पर अमोघ फल मिलता है. मानसिक और शारीरिक पीड़ा दूर होती है.
ॐ शन्नोदेवीरभिष्टय आपो भवन्तु पीतये।शंयोरभिश्रवन्तु नः। ऊँ शं शनैश्चराय नमः। - जिन लोगों पर शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या चल रही है वह निरंतर इस मंत्र का जाप करते हुए शनि देव की पूजा करें. ऐसा करने पर अमोघ फल मिलता है. मानसिक और शारीरिक पीड़ा दूर होती है.
ऊँ भगभवाय विद्महैं मृत्युरुपाय धीमहि तन्नो शनिः प्रचोद्यात्। - शनि देव का गायत्री मंत्र भौतिक सुख प्रदान करने वाला माना गया है. इससे शनि दोष, शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या के दुष्प्रभाव नहीं झेलने पड़ते. शनि देव जल्द प्रसन्न होते हैं.