5 अगस्त को पुत्रदा एकादशी और सावन मंगला गौरी व्रत का संयोग

पुत्रदा एकादशी और मंगला गौरी व्रत
सावन या श्रावण हिंदू धर्म पवित्र मास होता है. इस माह कई महत्वपूर्ण व्रत त्योहार पड़ते हैं. सावन समाप्त होने में अब कुछ ही दिन शेष हैं. लेकिन इससे पहले मंगला गौरी व्रत और पुत्रदा एकादशी का पर्व भी मनाया जाएगा.
5 अगस्त को मंगलवार के दिन सावन का अंतिम या चौथा मंगला गौरी व्रत है. इसी दिन पुत्रदा एकादशी व्रत भी रखा जाएगा. मंगला गौरी व्रत सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के लिए तो वहीं पुत्रदा एकादशी का व्रत संतान सुख की प्राप्ति के लिए रखा जाता है.
5 अगस्त को सावन माह के शुक्ल पक्ष की 11वीं तिथि रहेगी. सावन में एक ही तिथि में पुत्रदा एकादशी और मंगला गौरी व्रत पड़ने से इस दिन का महत्व कई गुणा बढ़ जाएगा और भक्तों को पूजा-व्रत का लाभ भी मिलेगा.
पुत्रदा एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना की जाती है. वहीं मंगला गौरी व्रत दिन मां महागौरी की पूजा की जाएगी. कामना पूर्ति के लिए ये दोनों ही व्रत फलदायी माने जाते हैं.
शुभ योग- 5 अगस्त को पुत्रदा एकादशी और मंगला गौरी व्रत पर कई शुभ योग का भी निर्माण हो रहा है, जोकि इस दिन की महत्ता को और अधिक बढ़ाएंगे. इस दिन रवि योग और गजलक्ष्मी राजयोग रहने वाला है.
भद्रा का साया- शुभ योग के साथ ही पुत्रदा एकादशी और मंगला गौरी व्रत के दिन भद्रा का साया भी रहने वाला है. 5 अगस्त को सुबह 05:45 से भद्रा प्रारंभ हो जाएगी और दोपहर 01:12 पर समाप्त होगी. भद्रा काल में पूजा-पाठ या शुभ कार्य वर्जित होते हैं.