Santo Ki Vani: संतों की वाणी में आज पढ़ें संत कबीर दास की अनमोल वाणी
कबीर दास जी कहते हैं कि संसारिक किताबे पढ़-पढ़ के लोग चले गए लेकिन कोई भी ज्ञानी नहीं बन सका. लेकिन जब कोई व्यक्ति अपने परमात्मा के नाम का सच्चे मन से स्मरण करता है तो उसको सच्चा ज्ञानी माना जाता है. वही परम तत्व का सच्चा पारखी होता है.
कबीर दास जी कहते हैं मेरे पास मेरा कुछ भी नहीं है, जो सब कुछ मिला है वो तेरा या प्रभु का ही दिया हुआ है. पैसा, शान, शौहरत सब भगनाव की है. मैं भगवान की दी हुई चीजें भगवान को ही समर्पित करता हूं.
कबीर दास की कहते हैं जिस मृत्यु से संसार डरता है, वो मृत्यु मेरे लिए आनंद है. कबीर दास जी कहते हैं कि कब मैं मरूँगा और कब ईश्वर के दर्शन करूँगा. मृत्यु के बाद ही ईश्वार के दर्शन हो पाएंगे.
कबीर दास जी कहते हैं कि माया बहुत ही पापिन है, ये लोगों को अपने भगवान या परमात्मा से विमुथ कर देती है. अपने मुख पर दुर्बुद्धि की कुंडी लगा देती है और राम-नाम का जप नहीं करने देती.
कबीर दास जी का मानना है कि तू-तू कहते-कहते मेरा अंहकार समाप्त हो गया. इस तरह भगवान पर न्यौछावर होते−होते मैं पूर्णतया समर्पित हो गई. अब तो जिधर देखती हूँ उधर तू ही दिखाई देता है.