वॉयेजर 1 की ऐतिहासिक छलांग, 13 नवंबर को पृथ्वी से एक प्रकाश दिन दूर, जानिए ज्योतिषीय महत्व?
13 नवंबर 2025 बुधवार के दिन एक दुर्लभ खगोलीय घटना देखने को मिलेगी. नासा का वॉयेजर 1 एक मानव निर्मित अंतरिक्ष यान जिसे साल 1977 में लॉन्च किया गया था. 13 नवंबर बुधवार के दिन यह यान पृथ्वी से एक प्रकाश दिन की दूरी पर पहुंचने वाला है.
अंतरिक्ष में आज तक मानव द्वारा निर्मित कोई भी यान इतनी दूरी तक नहीं पहुंचा है. विज्ञान जगत के साथ साथ ज्योतिषीय नजरिए से भी इस उपलब्धि का काफी महत्व है. जब कोई वस्तु पृथ्व की प्रभाव क्षेत्र से दूर जाती है तो यह इंसानी चेतनाओं की सीमाओं को तोड़ने के साथ नए अयाम की शुरुआत करती है.
वायेजर 1 की अंतरिक्ष यात्रा सूर्य की सीमा हीलियोपॉज को पार कर अंतरताकीय अंतरिक्ष प्रतिनिधित्व करती है. ज्योतिष शास्त्र में यह उस अवस्था की तरह है जब आत्मा देहिक सीमा को पार कर ब्रह्मांडीय यात्रा पर निकल जाती है.
ज्योतिषीय रूप से यह घटना इसलिए भी विशेष है क्योंकि यह शनि और यूरेनस से जुड़ी है, जो सीमाओं को तोड़ने के साथ तकनीकी प्रगति और आध्यात्मिक ऊर्जा को जागृत करने का काम करती है. वॉयेजर 1 यान का यह पड़ाव दर्शाता है कि मानव सभ्यता केवल भौतिक नहीं, बल्कि अंतरिक्षीय और आध्यात्मिक आयाम में भी ऊंचाई पर है.
अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा के मुताबिक, वॉयेजर आने वाले कई हजारों साल तक ऊर्ट बादल और अन्य तारों और ग्रहों के पास से गुजरेगा. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यह परिणाम दीर्घकालिक कर्म का है. वॉयेजर की अनंत यात्रा जिसमें वो लगातार नए ग्रहों और तारों से मिलेगी.
वॉयेजर 1 की यह स्थिति दर्शाती है कि मानवता अपने कर्मों के बल पर अंतरिक्ष में प्रसारित कर रही है. जब यह पृथ्वी से प्रकाश दिन की दूरी तय करेगा, तब मानव सभ्यता को अनंत ब्रह्मांड की अपार जानकारी मिलेगी.