मस्जिद-ए-नबवी में एक हफ्ते में पहुंच 67 लाख जायरीन, जानें क्या है इसका इतिहास, महत्व
हर साल जब दुनिया भर के मुसलमान हज करने सऊदी अरब आते हैं तो मस्जिद-ए-नवबी में नमाज़ ज़रूर पढ़ते हैं.
हज़रत मोहम्मद इस्लाम ने ही इस मस्जिद की बुनियाद रखी थी, वही इसके पहले इमाम थे. इस विशाल मस्जिद को आज अरबी भाषा में अल-मस्जिद अल-नबाविस कहते हैं.
मदीना की ये मस्जिद 1441 साल पहले बनी थी. इसे पैग़ंबर मोहम्मद के घर के बगल में ही सन 632 में बनाया गया था. मस्जिद के दायरे में पैग़ंबर मोहम्मद साहब की कब्र आती है.
इस्लामिक परंपराओं के मुताबिक़ नबी की मस्जिद में एक बार नमाज़ अदा करना, दुनिया की किसी और मस्जिद में एक हज़ार बार नमाज़ पढ़ने के बराबर माना गया है.
सुल्तान कुऐती की किताब के मुताबिक 1909 में पूरे अरब प्रायद्वीप में जो पहली जगह बिजली से रौशन की गई थी, वो मस्जिद-ए नबवी ही थी.
इस्लामिक मान्यताओं के मुताबिक़, जन्नत का एक हिस्सा यानी रौज़ा भी मस्जिद का ही हिस्सा है.