HemKund Sahib Yatra 2026 Date: हेमकुंड साहिब यात्रा कब शुरू होगी ? जानें क्या है इसका इतिहास, महत्व

हेमकुंड साहिब यात्रा 2026
हेमकुंड साहिब यात्रा उत्तराखंड की सबसे कठिन तीर्थ यात्राओं में से एक मानी जाती है. चमोली जिले में स्थित इस स्थान को सिखों का प्रमुख तीर्थ स्थल माना गया है.
यह गुरुद्वारा समुद्र तल से लगभ्ग 15 हजार फुट ऊंचाई पर सात बड़े पर्वतों से घिरा है. यहां अक्टूबर से मई तक बर्फ की बर्फ रहती है जिस वजह से यात्रा करना मुश्किल होता है लेकिन फिर भी श्रद्धालु अपनी अटूट आस्था और भक्ति के साथ इस पवित्र स्थल तक पहुंचते हैं.
हेमकुंड एक संस्कृत नाम है जिसका अर्थ है - हेम (बर्फ) और कुंड ( कटोरा) है. हेमकुंड साहिब का उल्लेख सिखों के पवित्र ग्रंथ दसम ग्रंथ में मिलता है। इस ग्रंथ में गुरु गोबिंद सिंह जी ने अपने पूर्व जन्म (तपस्या काल) का वर्णन किया है, जिसे “बचित्र नाटक” नामक रचना में बताया गया है.
इसके अनुसार गुरु गोबिंद सिंह जी ने अपने पूर्व जन्म में हिमालय की ऊंची पहाड़ियों में स्थित एक पवित्र स्थान पर कठोर तपस्या की थी. उस स्थान को हेमकुंट पर्वत सप्त श्रृंग कहा गया है, जिसका अर्थ है बर्फ से ढका सात चोटियों वाला पर्वत.
हेमकुंड साहिब के पास ही एक बड़ा तालाब भी है. मान्यता है कि हेमकुंड साहिब में सिखों के दसवें गुरु गुरुगोबिंद सिंह ने करीब 20 वर्षों तक कठोर तप किया था. जिस जगह गुरुजी ने तप किया था
इस स्थान को पहले लोकपाल कहा जाता है जिसका अर्थ है लोगों का निर्वाहक. हेमकुण्ड साहिब के पास सप्तऋषि चोटियां भी हैं. यहां खालसा पंथ का प्रतीक निशान साहिब ध्वज लगा हुआ है.