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Grah: मन में क्यों होता है वहम और इसके लिए जिम्मेदार आदतें कौन सी है

एबीपी लाइव   |  02 May 2025 06:30 PM (IST)
1

ज्योतिष के अनुसार राहु और केतु की प्रतिकूल स्थिति भी भ्रम और वहम को जन्म देती है.खासकर राहु जब चतुर्थ,अष्टम या द्वादश भाव में स्थित हो,तो व्यक्ति मानसिक द्वंद्व,काल्पनिक भय और अविश्वास से पीड़ित होता है.

2

वहम से बचने के लिए ध्यान,योग,सकारात्मक विचारों और सुदृढ़ दिनचर्या को अपनाना आवश्यक है. साथ ही, कुंडली में चंद्रमा और राहु की स्थिति को देखकर शांति उपाय करना चाहिए, जैसे चंद्र यंत्र की पूजा या राहु के बीज मंत्र का जाप.

3

राहु माया,भ्रम और काल्पनिकता का प्रतीक है.यदि राहु लग्न,चतुर्थ,अष्टम या द्वादश भाव में हो,या चंद्रमा के साथ युति कर रहा हो, तो व्यक्ति झूठी कल्पनाओं और वहम में जीने लगता है.राहु की शक्ति भ्रम को वास्तविकता बना देती है.

4

शनि जब चंद्रमा को दृष्टि देता है या उसके साथ युति करता है, तो मन भारी, चिंतित और आशंकित हो जाता है. शनि की यह दृष्टि व्यक्ति को हतोत्साहित करती है और वह हर परिस्थिति में नकारात्मक पहलू खोजने लगता है, जिससे वहम की शुरुआत होती है.

5

बुध बुद्धि और निर्णय का ग्रह है.जब बुध राहु या केतु से पीड़ित हो,या नीच का हो जाए,तो व्यक्ति की तर्कशक्ति क्षीण हो जाती है.इस कारण वह कल्पना और वास्तविकता में अंतर नहीं कर पाता,और वहम का शिकार हो जाता है.

6

शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या के दौरान भी वहम और मानसिक अशांति बढ़ सकती है. चंद्रमा पर शनि की प्रभावी दशा या गोचर व्यक्ति को गहन मनोवैज्ञानिक दबाव में डालती है, जिससे वह भ्रम, डर और संशय से घिर जाता है.

7

द्वादश भाव व्यर्थ कल्पना, डर और अतीन्द्रिय अनुभवों का प्रतिनिधि होता है. जब चंद्रमा या राहु इस भाव में हो, तो व्यक्ति काल्पनिक भय, वहम और मानसिक थकावट का अनुभव करता है. यह स्थिति उसे वास्तविकता से काट देती है.

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