Ganga Saptami 2025: गंगा सप्तमी और गंगा दशहरा में क्या अंतर है, जानें

गंगा सप्तमी और गंगा दशहरा में अंतर
गंगा सप्तमी और गंगा दशहरा दोनों ही हिंदू धर्म में महत्वपूर्ण त्योहार हैं जोमां गंगे की पूजा और महत्व से जुड़े हैं. दोनों त्योहारों में गंगा नदी की पूजा और स्नान का महत्व है, लेकिन गंगा दशहरा में दस पापों से मुक्ति की मान्यता अधिक प्रमुख है.
हिंदू धर्म में गंगा सप्तमी और गंगा दशहरा दो प्रमुख पर्व हैं जो मां गंगा की उपासना और महत्व से जुड़े हुए हैं. ये दोनों त्योहार अपने आप में विशेष महत्व रखते हैं और इन दिनों में लोग गंगा नदी की पूजा-अर्चना करके आध्यात्मिक शांति और पुण्य की कामना करते हैं. आइए जानते हैं कि गंगा सप्तमी और गंगा दशहरा के अवसर पर क्या विशेष है और इनका महत्व क्या है.
गंगा सप्तमी एक महत्वपूर्ण हिंदू त्योहार है, जो वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाया जाता है. इस दिन को गंगा जयंती के रूप में भी मनाया जाता है, क्योंकि इस दिन मां गंगा स्वर्गलोक से भगवान शिव की जटाओं में पहुंची थी. इस दिन गंगा नदी में डुबकी लगाने से मनुष्य के सभी पाप धुल जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है. गंगा सप्तमी के अवसर पर दान-पुण्य का विशेष महत्व है, जिससे पुण्य की प्राप्ति होती है.
गंगा दशहरा एक महत्वपूर्ण हिंदू त्योहार है, जो ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है. इस दिन मां गंगा की पूजा और स्नान का विशेष महत्व है. इस दिन गंगा नदी में डुबकी लगाने से दस प्रकार के पापों से मुक्ति मिलती है, जिनमें तीन प्रकार के पाप शरीर से, चार प्रकार के पाप वाणी से और तीन प्रकार के पाप मन से संबंधित होते हैं.आइए जानते हैं कि गंगा सप्तमी और गंगा दशहरा में क्या अंतर है.
गंगा सप्तमी और गंगा दशहरा दोनों ही महत्वपूर्ण त्योहार हैं जो मां गंगा की महत्ता से जुड़े हुए हैं. इन दोनों त्योहारों के बीच एक विशेष अंतर है जो उनके महत्व को और भी बढ़ाता है. गंगा सप्तमी वैशाख माह की शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाई जाती है, जो मां गंगा के जन्म का दिन है. इस दिन मां गंगा ने भगवान विष्णु की वंदना की थी और स्वर्ग में अपना स्थान बनाया था.
वहीं, गंगा दशहरा ज्येष्ठ माह की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है, जो मां गंगा के पृथ्वी पर आगमन का दिन है. इस दिन भगवान शिव की जटाओं से मां गंगा का अवतरण हुआ था और वह पवित्र गंगा नदी के रूप में धरती पर बहने लगीं. इन दोनों दिनों पर मां गंगा की पूजा-अर्चना करना और गंगा स्नान करना बहुत फलदायी माना जाता है.