Eid-ul-fitr Moon 2026: ईद का नया चांद देखने की जरूरी शर्तें क्या हैं, जान लें नियम

ईद-उल-फितर का चांद
ईद का चांद (शव्वाल का नया चांद) आमतौर पर रमजान महीने की 29वीं या 30वीं तारीख की शाम को देखा जाता है. रोजेदार 29वें रोजे का इफ्तार करने के बाद नया चांद देखने की कोशिश करते हैं. अगर चांद नजर आता है तो अगले दिन ईद होती है. वहीं चांद नहीं दिखाई देता तो 30 रोजा पूरा करने के बाद ईद मनाई जाती है.
ईद का चांद अर्धचंद्राकार होता है, जो आसानी से आसमान में नजर नहीं आता है. इसलिए ईद का चांद देखने के कुछ जरूरी नियम और शर्तें होती हैं, जिसे हर मुसलमान को जरूर जानना चाहिए.
ईद का चांद देखने का मुख्य शर्त यह है कि, इसका सूर्यास्त के बाद क्षितिज (Horizon) पर पतली अर्धचंद्राकार आकृति का होना, आसमान का साफ दिखाई देना और विश्वसनीय गवाहों द्वारा चांद का देखा जाना आदि.
ईद का चांद रमजान की 29वीं या 30वीं तारीख की शाम में देखा जाना चाहिए. इसके पहले यदि रमजान में चांद देखा जाए तो उसके आधार पर ईद नहीं मनाई जाती है. 29 या 30 रोजा पूरा होने के बाद ही ईद होती है.
ईद का चांद देखने के दिशानिर्देश पर गौर करें तो, अर्धचंद्राकार चांद को पश्चिम दिशा में सूर्यास्त के ठीक बाद देखा जाता है. ईद के चांद का आकार बहुत पतला होने के कारण इसे आसानी से नहीं देखा जाता है. हां, अगर आसमान साफ हो तो चांद दिख जाता है.
ईद मनाए जाने के लिए नया चांद देखना जरूरी होता है. लेकिन कई बार किसी स्थान पर चांद किसी कारण नजर नहीं आता तो, कुछ अन्य स्थानों पर दिखे चांद को भी स्वीकार कर अगले दिन ईद मनाई जा सकती है.