✕
  • होम
  • इंडिया
  • विश्व
  • उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड
  • बिहार
  • दिल्ली NCR
  • महाराष्ट्र
  • राजस्थान
  • मध्य प्रदेश
  • हरियाणा
  • पंजाब
  • झारखंड
  • गुजरात
  • छत्तीसगढ़
  • हिमाचल प्रदेश
  • जम्मू और कश्मीर
  • बॉलीवुड
  • ओटीटी
  • टेलीविजन
  • तमिल सिनेमा
  • भोजपुरी सिनेमा
  • मूवी रिव्यू
  • रीजनल सिनेमा
  • क्रिकेट
  • आईपीएल
  • कबड्डी
  • हॉकी
  • WWE
  • ओलिंपिक
  • धर्म
  • राशिफल
  • अंक ज्योतिष
  • वास्तु शास्त्र
  • ग्रह गोचर
  • एस्ट्रो स्पेशल
  • बिजनेस
  • हेल्थ
  • रिलेशनशिप
  • ट्रैवल
  • फ़ूड
  • पैरेंटिंग
  • फैशन
  • होम टिप्स
  • GK
  • टेक
  • ट्रेंडिंग
  • शिक्षा
  • ऑटो

Mahabharat: एक अपमान ने बदल दी दो मित्रों की किस्मत, महाभारत की यह कथा देती है बड़ी सीख

अणिमा शुक्ला   |  07 Jun 2026 06:00 AM (IST)
Mahabharat: एक अपमान ने बदल दी दो मित्रों की किस्मत, महाभारत की यह कथा देती है बड़ी सीख

महाभारत कथा

1

आचार्य द्रोणाचार्य ने अपने शिष्यों से गुरु दक्षिणा के रूप में पांचाल नरेश द्रुपद को बंदी बनाकर लाने की इच्छा जताई. यह केवल एक युद्ध नहीं था, बल्कि वर्षों पुराने अपमान का प्रतिशोध भी था. गुरु का आदेश सुनते ही कौरव और पांडव दोनों युद्ध की तैयारी में जुट गए.

Continues below advertisement
2

दुर्योधन, कर्ण और अन्य कौरव योद्धा विशाल सेना लेकर पांचाल राज्य पर चढ़ाई कर देते हैं. उन्हें विश्वास था कि वे आसानी से द्रुपद को पराजित कर देंगे. लेकिन पांचाल की सेना ने जबरदस्त प्रतिरोध किया और युद्ध का रुख बदलना शुरू कर दिया.

Continues below advertisement
3

राजा द्रुपद स्वयं रणभूमि में उतरे और अद्भुत पराक्रम दिखाया. उनके बाणों और युद्ध कौशल के सामने कौरव सेना टिक नहीं पाई. दुर्योधन और उसके साथी योद्धाओं को पीछे हटना पड़ा. कौरवों की यह हार सभी के लिए एक बड़ा झटका साबित हुई.

4

कौरवों की असफलता देखकर अर्जुन ने युद्ध की स्थिति का आकलन किया. उन्होंने समझ लिया कि केवल सेना से लड़ना पर्याप्त नहीं होगा. अर्जुन ने अपने भाइयों के साथ मिलकर सीधे द्रुपद तक पहुंचने और उन्हें बंदी बनाने की रणनीति तैयार की.

5

युद्ध के दौरान भीमसेन गदा लेकर शत्रु सेना पर टूट पड़े. उनके प्रहार से हाथी, घोड़े और रथों में भगदड़ मच गई. पांचाल सेना के अनेक योद्धा भयभीत हो गए. भीम के इस विकराल रूप ने पांडवों के लिए विजय का मार्ग आसान कर दिया.

6

रणभूमि में अर्जुन और राजा द्रुपद आमने-सामने आए. दोनों ओर से बाणों की वर्षा होने लगी. द्रुपद ने पूरी शक्ति से मुकाबला किया, लेकिन अर्जुन की अद्वितीय धनुर्विद्या के सामने उनकी रणनीति कमजोर पड़ने लगी. युद्ध का निर्णायक क्षण अब निकट था.

7

अर्जुन ने अपने तीव्र और सटीक बाणों से द्रुपद का धनुष काट दिया. इसके बाद उन्होंने तेजी से आगे बढ़कर राजा को घेर लिया और बंदी बना लिया. पांचाल सेना अपने राजा को बचाने में असफल रही. इस प्रकार गुरु दक्षिणा पूरी होने की दिशा में सबसे बड़ा कदम उठ गया.

8

अर्जुन बंदी द्रुपद को द्रोणाचार्य के सामने ले आए. द्रोण ने अपने पुराने मित्र को याद दिलाया कि कभी उन्होंने मित्रता का अपमान किया था. इसके बाद द्रोणाचार्य ने द्रुपद का आधा राज्य अपने अधिकार में लेकर शेष आधा उन्हें लौटा दिया. इस घटना ने दोनों के बीच वैर की नई कहानी की नींव रख दी.

9

द्रोणाचार्य और द्रुपद की यह कथा बताती है कि मित्रता में अहंकार और अपमान की कोई जगह नहीं होनी चाहिए. अर्जुन का उदाहरण सिखाता है कि सफलता केवल शक्ति से नहीं, बल्कि अनुशासन, समर्पण और सही रणनीति से मिलती है. जीवन में विनम्रता, सम्मान और धैर्य ही व्यक्ति को सच्ची विजय दिलाते हैं.

  • हिंदी न्यूज़
  • फोटो गैलरी
  • ऐस्ट्रो
  • Mahabharat: एक अपमान ने बदल दी दो मित्रों की किस्मत, महाभारत की यह कथा देती है बड़ी सीख
Continues below advertisement
About us | Advertisement| Privacy policy
© Copyright@2026.ABP Network Private Limited. All rights reserved.