Delhi Mata Mandir: दिल्ली में माता के 5 प्रसिद्ध मंदिर, नवरात्रि में दर्शन से पूरी होती है मनोकामना
झंडेवाली माता मंदिर - ये मंदिर दिल्ली के करोल बाग क्षेत्र के पास स्थित है. झंडेवाला मंदिर का इतिहास 18वीं सदी के आस-पास से मिलता है यहां एक गुफा है, जहां मां के मूल प्रतिमा के दर्शन होते हैं. मायहां के एक व्यापारी को सपने में माता ने दर्शन दिए और इस स्थान पर खुदाई करने को कहा. खुदाई में देवी की प्राचीन मूर्ति मिली. इसके बाद यहां मंदिर की स्थापना की गई. भक्त अपनी मनोकामना पूरी होने पर झंडा (ध्वज) चढ़ाते थे
कालकाजी मंदिर - ये मंदिर देवी काली को समर्पित है. इस मंदिर का निर्माण 1764 ई. में हुआ था. पौराणिक कथा के अनुसार, जब देवी ने राक्षसों का संहार किया, तब देवताओं ने उनसे यहीं निवास करने का आग्रह किया और तभी से यह स्थान सिद्धपीठ बन गया. इस मंदिर को जयंती पीठ और मनोकामना सिद्ध पीठ के नाम से भी जानते हैं.
योगमाया मंदिर - योगमाया मंदिर कुतुब मीनार से सौ मीटर की दूरी पर महरौली के पास में स्थित एक प्राचीन हिंदू मंदिर है. योगमाया वह देवी हैं, जिन्हें कृष्ण के पिता ने यमुना नदी को पार करके लाया गया था और कृष्ण की जगह पर देवकी के बगल में रख दिया था. दिल्ली में कई मंदिर नष्ट हुए, लेकिन योगमाया मंदिर बचा रहा.
छतरपुर मंदिर- ये मंदिर दिल्ली के दक्षिण-पश्चिमी बाहरी इलाके में स्थित है. इसकी स्थापना 1974 में हुई थी. पहले यह एक छोटी कुटिया हुआ करती थी, जिसे बाद में बाबा नागपाल जी ने एक भव्य मंदिर के रूप में विकसित किया. यहाँ माँ कात्यायनी की दिव्य मूर्ति स्थापित है. यहां माता के श्रृंगार के लिए खासतौर पर दक्षिण भारत से फूल मंगवाए जाते हैं.
शीतला माता मंदिर - दिल्ली से सटे गुरुग्राम में शीतला माता मंदिर प्रसिद्ध प्राचीन मंदिर में से एक है. इसका इतिहास महाभारत काल से बताया जाता है. मान्यता है कि पांडव ने अज्ञातवास के दौरान यहां पूजा की थी.