चाणक्य नीति का कड़वा सच ये 7 लोग पढ़े-लिखे होकर भी मूर्ख रह जाते हैं!
चाणक्य नीति महान भारतीय विचारक चाणक्य की शिक्षाओं पर आधारित है. चाणक्य नीति में जीवन, पैसे, अच्छे मूल्यों और समाज में लोग कैसे काम करते हैं? इसके बारे में सामाजिक सलाह दी गई है. चाणक्य नीति के मुताबिक 7 ऐसे लोग जिनको शिक्षा मिलने के बाद भी वो बुद्धिमान नहीं बन सकते हैं.
चाणक्य ने कहा था कि, शिक्षा केवल उन्हीं लोगों की सहायता करती है, जिसमें सुनने, समझने और सोचने की क्षमता होती है. जिन लोगों में बुद्धि की कमी होती है, उन्हें शिक्षा से ज्ञान प्राप्त नहीं होता है.
चाणक्य के मुताबिक कोई भी चीज सीखना तभी फायदेमंद साबित हो सकती है, जब कोई इंसान सीखने की चाह रखता हो. जो लोग ज्ञान प्राप्ति में दिलचस्पी नहीं रखते हैं, उन्हें शिक्षा का कोई भी लाभ नहीं मिलता है.
चाणक्य के अनुसार अगर कोई इंसान असल जीवन में इसका इस्तेमाल नहीं करता है तो शिक्षा बेकार है. चाणक्य ने सिखाया है कि, ज्ञान केवल ज्ञान इक्ट्ठा करने से ही नहीं, बल्कि सीखी हुई बातों को प्रयोग में लाने से भी आता है.
चाणक्य कहते हैं कि, पढ़ाई में डिसीप्लीन और आत्म संयम बेहद जरूरी है. इन गुणों के बिना किसी भी व्यक्ति का ज्ञान प्राप्त करना मुश्किल है. चाहे वह कितनी ही पढ़ाई क्यों न कर लें.
चाणक्य ने बताया है कि, गलत लोगों के साथ समय बिताने से गलत फैसले लेने की संभावना बढ़ जाती है. गलत फैसले का प्रभाव व्यक्ति को सच्चे ज्ञान से अलग रखती है.
चाणक्य कहते हैं कि, पैसा और ज्ञान को धीरे-धीरे प्राप्त करना चाहिए. ऐसे लोग जो केवल पैसों पर ध्यान देते हैं, वे ज्ञान से चूक सकते हैं.
चाणक्य के अनुसार, पढ़ाई करने से कोई भी इंसान समझदार नहीं बनता है. सच्ची समझदारी के लिए ज्ञान और आध्यात्मिक जागरूकता में सामंजस्य स्थापित करें.
चाणक्य नीति के अनुसार, शिक्षा काफी जरूरी है, लेकिन ज्ञान के लिए पर्याप्त नहीं है. समझदारी, अनुशासन, अच्छी संगति और ज्ञान और आध्यात्मिकता बनाए रखने के लिए जरूरी है.