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2026 में खगोलीय धमाका! ग्रहण, सुपरमून और उल्कापात का अद्भुत नजारा, जानें कब और कैसे देखें?

अंकुर अग्निहोत्री   |  24 Jan 2026 05:03 PM (IST)
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साल 2026 उन लोगों के लिए मजेदार होने वाला है, जिन्हें खगोलीय घटना में दिलचस्पी है. ग्रहण, सुपरमून, उल्कापिंडों की बारिश और कई तरह खगोलीय घटनाओं को देख सकेंगे, जिनके बारे में आपको जानना चाहिए.

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इस साल 3 सुपरमून दिखने का अनुमान है. जिसमें पहला वुल्फ फुल मूनस शनिवार 3 जनवरी को हो चुका है. पृथ्वी के बेहद नजदीक होने के कारण ये चांद सामान्य से कई गुना चमकीला और भरे हुए दिखते हैं.

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आगे आने वाला 2 सुपरमून नवंबर और फिर दिसंबर में होंगे. अर्थस्काई के मुताबिक, यह सुपरमून हमारे सैटेलाइट से करीब 356,740 किलोमीटर दूर होगा, जबकि औसत 384,472 किलोमीटर होता है.

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इस वर्ष 13 पूर्णिमा होगी. ये प्रत्येक 29 दिन में होती हैं, जबकि हमारे करीब-करीब सभी महीने 30 या 31 दिन के होते हैं. दूसरी पूर्णिमा जिसे ब्लू मून भी कहते हैं, ये मई महीने में घटेगी.

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हर पूर्णिमा का अपना एक नाम होता है और कुछ नाम विशेषतौर पर सही होते हैं, जैसे 1 फरवरी को स्नो मून, 29 जून को स्ट्रॉबेरी मून, 29 जुलाई को डियर मून और 26 सितंबर को हार्वेस्ट मून कहा जाता है.

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इस साल कई उल्कापिंडों की बारिश भी होगी. जनवरी में क्वाड्रेंटिड्स के बाद शौकिन लोग 21 और 22 अप्रैल को लिरिड्स देखेंगे, उसके बाद 5 और 6 मई को टाटा एक्वेरिड्स देखेंगे.

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वर्ष भर भारत में कुल 12 उल्का पिंडों की बारिश होगी. इनमें पर्सिड्स (12 और 13 अगस्त), ओरियोनिड्स (21 और 22 अक्टूबर), सदर्न टॉरिड्स (4 और 5 नवंबर), नॉर्दर्न टॉरिड्स (11 और 12 नवंबर), और अंतिम में जेमिनिड्स (13 और 14 दिसंबर) शामिल हैं.

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सीएनएन के मुताबिक, अमेरिकन मेटियोर सोसाइटी के रॉबर्ट लंसफोर्ड ने बताया कि, पर्सिड्स और जेमिनिड्स इस वर्ष की सबसे अच्छी बारिश होंगी. अनुमान लगाया जा रहा है कि, पर्सिड्स चांद के दखल के बिना अपने सबसे अधिक प्रभाव तक पहुंचेंगे.

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साल 2026 में भी सूर्य ग्रहण की उम्मीद है. जिसमें पहला एन्युलर अंटार्कटिका के ऊपर से गुजरेगा. यह घटना हर साल तब होती है, जब चांद पृथ्वी और सूरज के मध्य से गुजरकर पृथ्वी के मुकाबले अपनी ऑर्बिट में सबसे दूर या पास होता है.

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इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस कारण चांद टोटल सोलर एक्लिप्स की तरह सूरज की पूरी परत से ढक नहीं पाता है और इसके बजाय सूर्य की तेज रोशनी चांद की परछाई को घेर लेती है, जिसे रिंग ऑफ फायर बनता है.

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अंटार्कटिका, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका में भी आधे चांद जैसे आकार का सूर्य ग्रहण साफ तौर पर देखा जा सकेगा. अपनी आंखों को ग्रहण के चश्मे से कवर करें, ठीक वैसे ही जैसे आप पूर्ण ग्रहण के दौरान करते हैं.

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इस साल 12 अगस्त को धरती के दूसरी ओर ग्रीनलैंड, आइसलैंड, स्पेन, रूस और पुर्तगाल के कुछ भागों में सूर्य ग्रहण दिखेगा. इसके अलावा यूरोप, अफ्रीका और नॉर्थ अमेरिका में पार्शियल ग्रहण लगेगा.

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इस वर्ष चांद पर भी ग्रहण लगेगा. पहला टोटल ग्रहण, 3 मार्च को एशिया, ऑस्ट्रेलिया, पैसिफिक आइसलैंड्स और अमेरिका में होगा.

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इस साल के आखिर में 27 और 28 अगस्त के बीच अमेरिका, यूरोपियन और अफ्रीकी महाद्वीपों के साथ-साथ पश्चिमी एशिया में भी आंशिक चंद्र ग्रहण दिखाई देगा.

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साल 2026 की एक खास घटना फरवरी में आसमान में कम से कम 6 ग्रहों की परेड शुरू होगी. अर्थ स्काई के अनुसार, शनि क्षितिज के पास होगा, जबकि शुक्र और बुध डूबते सूरज के ऊपर उगते हुए दिखाई देंगे.

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इस दौरान प्रशंसक शनि के पास नेपच्यून को भी देख पाएंगे, बस उनके पास टेलिस्कोप या बाइनोकुलर होना चाहिए. 23 फरवरी को चांद के पास यूरेनस को देखने के लिए भी टूल्स की मदद लगेगी, आखिर में जुपिटर 26 के आसपास दिखाई देगा.

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अगर आप इन खगोलीय घटनाओं को फरवरी में न देख पाएं तो बाद में भी देख सकते हैं. 19 मई को सूरज डूबने के बाद जुपिटर और वीनस के बीच क्रिसेंट मून चमकेगा. ये दोनों ही ग्रह जून की शुरुआत में एक बार फिर से साथ दिखेंगे.

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आखिर में एक ऑप्टिकल इल्यूजन आपको 6 अक्टूबर को जुपिटर के गायब होने के एहसास करा सकता है. क्रिसेंट मून और गैस जायंट इतने करीब होंगे कि, नॉर्थ अमेरिका के कुछ भागों में चांद करीब एक घंटे तक प्लैनेट को छिपाता हुआ दिखेगा, इससे पहले कि वह दूसरी ओर फिर से दिखाई दें. यह साल स्टार गेजर्स के लिए किसी ट्रीट से कम नहीं है.

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