Rice and Fish Farming: धान की फसल के साथ कर लें ये काम, दोगुना हो जाएगा मुनाफा

धान की खेती कर रहे किसानों के लिए अक्सर ये परेशानी होती है कि केवल धान से उन्हें अच्छा मुनाफा नहीं मिलता. ऐसे में क्या होगा अगर आपको पता चले कि एक रास्ता ऐसा भी है जिससे धान के अलावा दो गुना ज्यादा मुनाफा कमाया जा सकता है? हम बात कर रहे हैं मछली पालन की. अगर आप धान की खेती करते हैं और हर साल बस उतनी ही कमाई से संतुष्ट हो जाते हैं, तो अब वक्त आ गया है कुछ नया सोचने का.
धान की फसल काटने के बाद खेत महीनों खाली पड़ा रहता है और किसान अगली फसल के इंतज़ार में बैठे रहते हैं. लेकिन अब मछली पालन को अपनाकर धान की कटाई के बाद भी किसान मुनाफा कमा रहे हैं. इसे कहते हैं धान-मछली खेती, यानी Rice-Fish Farming.
इस तरीके को समझना बहुत आसान है. धान की रोपाई के लिए वैसे भी खेत में काफी पानी भरकर रखना पड़ता है. किसान खेत के चारों तरफ छोटी मेढ़ बनाते हैं, ताकि पानी रुका रहे. अब इसी पानी में मछली के बीज यानी फिंगरलिंग डाल दिए जाएं तो धान के साथ-साथ मछली भी बढ़ने लगती है. मतलब एक ही खेत, एक ही पानी और दो-दो फसलें. मछलियां खेत में मौजूद कीड़े-मकोड़े और घास खाती रहती हैं, जिससे धान की फसल को कीटनाशकों की जरूरत कम पड़ती है. साथ ही मछलियों का मल खेत के लिए प्राकृतिक खाद का काम करता है, जिससे धान की पैदावार भी बेहतर होती है.
अब बात करते हैं इसे शुरू करने के लिए किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है. सबसे पहली शर्त है कि आपके खेत में पानी रोके रखने की अच्छी क्षमता होनी चाहिए. अगर खेत से पानी जल्दी निकल जाता है तो मछलियां जिंदा नहीं रह पाएंगी. इसके लिए खेत के चारों ओर मजबूत मेढ़ बनानी पड़ती है और जरूरत पड़े तो जाल की घेराबंदी भी की जा सकती है, ताकि मछलियां बाहर न निकल सकें और कोई उन्हें चुरा भी न सके. इसके अलावा ये भी ध्यान रखें कि मछली की वही प्रजाति चुनें जो धान के खेत के माहौल में अच्छी तरह जिंदा रह सके, जैसे रोहू, कतला, मांगुर या देसी कार्प मछलियां.
अब सवाल यह आता है कि इससे फायदा कितना होता है. जिन किसानों ने इस तरीके को अपनाया है, उनके अनुभव बताते हैं कि यह वाकई एक समझदारी भरा फैसला है. कई किसानों ने बताया कि मछली पालन को धान की खेती के साथ जोड़ने के बाद, अब वे सालाना करीब सात लाख रुपये की कमाई कर रहे हैं और बहुत से किसानों के लिए मिसाल बन रहे हैं.
सबसे अच्छी बात यह है कि यह तरीका छोटे और मझोले किसानों के लिए खास तौर पर फायदेमंद है, जिनके पास सीमित जमीन होती है. उन्हें अलग से तालाब बनाने या मछली पालन के लिए नई जमीन खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती. इसके अलावा सरकार भी मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चला रही है. बिहार जैसे राज्यों में मत्स्य प्रजाति विविधीकरण योजना के तहत किसानों को मछली पालन शुरू करने के लिए सब्सिडी भी दी जा रही है, ताकि ज्यादा से ज्यादा किसान इस तरीके को अपनाएं और अपनी आय बढ़ा सकें.
बेशक इस खेती में कुछ सावधानियां भी जरूरी हैं, जैसे खेत में पानी की लगातार उचित मात्रा बनाए रखना, सही समय पर मछली के बीज डालना, और कीटनाशकों का इस्तेमाल बहुत सीमित रखना ताकि मछलियों को नुकसान न हो. लेकिन जो किसान इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखते हैं, उनके लिए यह तरीका वाकई वरदान साबित होता है. धान भी पूरी तरह तैयार होता है और साथ में मछली बेचकर अतिरिक्त मुनाफा भी हाथ लगता है.