Purple Tomato की खेती क्या है? विदेशी सब्जी की भारत में बढ़ रही डिमांड

आजकल मार्केट में पारंपरिक लाल टमाटर के अलावा एक नए तरह के टमाटर की खूब चर्चा हो रही है. जिसे हम पर्पल टोमैटो यानी बैंगनी टमाटर कहते हैं. यह एक खास किस्म की विदेशी सब्जी है जिसे अमेरिकी वैज्ञानिकों ने अपनी रिसर्च के जरिए तैयार किया है. भारत के बाजारों और आधुनिक किचन में अब इसकी डिमांड तेजी से बढ़ रही है.
इस बैंगनी टमाटर को जेनेटिकली मॉडिफाइड तकनीक यानी जीएमओ के जरिए विकसित किया गया है. वैज्ञानिकों ने स्नैपड्रैगन नाम के एक खूबसूरत फूल के जींस को सामान्य लाल टमाटर में शामिल करके इस नई किस्म को तैयार किया है. यही वजह है कि इसका रंग बाहर और अंदर दोनों तरफ से गहरा बैंगनी या जामुनी दिखाई देता है.
इस टमाटर की सबसे बड़ी खासियत इसके भीतर मौजूद एंटी-कैंसर और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण हैं. इसमें भरपूर मात्रा में एंथोसायनिन नाम का एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है. जो आमतौर पर ब्लूबेरी और ब्लैकबेरी जैसे महंगे फलों में मिलता है. यह तत्व शरीर को कई तरह की गंभीर बीमारियों और कैंसर जैसी जानलेवा दिक्कतों से बचाने में काफी मददगार साबित होता है.
हेल्थ बेनिफिट्स के साथ-साथ यह फसल किसानों के लिए भी बेहद फायदेमंद मानी जा रही है. पर्पल टोमैटो की इस खास वैरायटी को इस तरह तैयार किया गया है कि इसमें आम फसलों के मुकाबले बीमारियां और कीट लगने का खतरा बहुत कम होता है. रोग प्रतिरोधक क्षमता ज्यादा होने की वजह से इसकी खेती में कीटनाशकों का खर्च घट जाता है.
व्यापारिक नजरिए से देखें तो इस विदेशी टमाटर की शेल्फ लाइफ यानी भंडारण क्षमता आम लाल टमाटर के मुकाबले लगभग दोगुनी होती है. एंथोसायनिन की वजह से यह जल्दी सड़ता या गलता नहीं है और इस पर फंगस का अटैक भी देर से होता है. इसके चलते ट्रांसपोर्टेशन के दौरान किसानों और व्यापारियों का नुकसान काफी कम हो जाता है.
भारतीय बाजारों में फिटनेस और अच्छी सेहत को लेकर सजग रहने वाले लोगों के बीच इस सुपरफूड की डिमांड दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है. लोग अपनी डाइट को न्यूट्रिशियस बनाने के लिए इसे महंगे दामों पर भी खरीदने को तैयार हैं. यही कारण है कि भारत के प्रगतिशील किसान अब इसकी आधुनिक खेती की तरफ आकर्षित हो रहे हैं.
अगर मुनाफे की बात करें तो पर्पल टोमैटो की खेती से किसान बेहद कम लागत में बंपर कमाई कर सकते हैं. सामान्य टमाटर के मुकाबले मार्केट में इसकी कीमत कई गुना ज्यादा मिलती है. कम देखरेख लंबी शेल्फ लाइफ और बंपर डिमांड की वजह से यह विदेशी सब्जी भारतीय किसानों की किस्मत बदलने का एक शानदार जरिया बन रही है.