litchi Farming: क्या किचन गार्डन में भी उगा सकते हैं लीची, जान लें खेती का तरीका?

litchi Farming: गर्मियों के मौसम में लीची खाना लोगों को काफी पसंद होता है. बच्चों से लेकर बड़ों तक इसका मीठा स्वाद सभी को पसंद आता है. वहीं कई बार बाजार में केमिकल और रसायनिक पदार्थों से पकी लीची भी मिलती है. ऐसे में लोग बाजार में मिलने वाली लीची से ज्यादा अपने गार्डन में पकी लीची खाना ज्यादा पसंद करते हैं लेकिन इसके लिए जरूरी है कि आप अपने गार्डन में लीची की खेती करें. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि आप अपने किचन गार्डन में लीची कैसे उगा सकते हैं.
दरअसल ज्यादातर लोगों को लगता है कि लीची सिर्फ बड़े बागानों में ही उगाई जा सकती है, लेकिन अगर सही तरीका अपनाया जाए, सही मिट्टी हो और नियमित देखभाल की जाए तो लीची का पौधा घर के गार्डन में भी लगाया जा सकता है.
लीची के पौधे को फल देने में थोड़ा समय लगता है लेकिन एक बार अच्छे से बढ़ने पर लंबे समय तक यह फल दे सकता है. हालांकि इसके लिए थोड़ी मेहनत और सही देखभाल की जरूरत होती है.
वहीं लीची की खेती मुख्य रूप से दो तरीकों से की जाती है. एक बीज से पौधा तैयार करके और दूसरा नर्सरी से तैयार ग्राफ्टेड या एयर लेयरिंग पौधा लाकर इसकी खेती की जा सकती है. एक्सपर्ट्स के अनुसार बीज से उगाए गए पौधों को फल देने में 8 से 10 साल लग जाते हैं, जबकि नर्सरी से खरीदा गया ग्राफ्टेड पौधा 3 से 5 साल में फल देना शुरू कर सकता है.
लीची का पौधा लगाने के लिए सबसे पहले आपको अच्छी जल निकासी वाली उपजाऊ मिट्टी लेनी होगी. इसलिए इसके गमले में एक हिस्सा बगीचे की मिट्टी, एक हिस्सा नदी की बालू और एक हिस्सा में वर्मी कंपोस्ट या गोबर की सड़ी खाद मिलाकर भरें. इससे जड़ों का विकास सही से होता है और पौधे की ग्रोथ भी अच्छी होती है.
वहीं लीची का पौधा गर्मी और नम वातावरण में बेहतर बढ़ता है. ऐसे में इसे उस जगह पर लगाए जहां इसे कम से कम 5 से घंटे की धूप मिले. मिट्टी में नमी बनी रहे और गर्मी में नियमित इसकी सिंचाई हो. ध्यान रखें लीची के गमले में पानी जमा नहीं होना चाहिए, वरना इसकी जड़ भी सड़ जाती है. इसके अलावा लीची के पौधे की समय-समय पर गुड़ाई भी करते रहे.
लीची का पौधा लगाने के लिए आप शाही, चाइना और बीजदान जैसी किस्म का उपयोग कर सकते हैं. इन किस्मों की बाजार में मांग भी रहती है .
अगर आप घर के गार्डन में लीची लगा रहे हैं तो ध्यान रखें कि उसमें समय-समय पर जैविक खाद डालें. खरपतवार न होने दें, पौधे की गुड़ाई करते रहे, कीटों से बचाव के लिए नीम आधारित गोल का छिड़काव करें और मंजर आने के समय पौधे की विशेष निगरानी जरूरी करें.