बरसात के मौसम में मछलियां नहीं होंगी बीमार, जुलाई में रखें इन बातों का ध्यान, बढ़ेगी ग्रोथ

बरसात का मौसम शुरू होते ही मछली पालन करने वाले किसानों के लिए चुनौतियां काफी बढ़ जाती हैं. इस सुहाने मौसम में जहां एक तरफ मछलियों की ग्रोथ तेजी से होने की उम्मीद रहती है. वहीं दूसरी तरफ तालाब का मैनेजमेंट बिगड़ने से बीमारियां फैलने का खतरा भी सबसे ज्यादा होता है.
मछली पालन करने वाले किसानों के लिए जुलाई के इस महीने में थोड़ी सी एक्स्ट्रा देखभाल बहुत जरूरी है. मानसून की पहली बारिश के साथ ही तालाब के पानी का पीएच लेवल तेजी से ऊपर-नीचे होने लगता है, जो मछलियों की सेहत के लिए बिल्कुल ठीक नहीं है.
लगातार हो रही बारिश की वजह से पानी में एसिडिटी बढ़ सकती है. इस समस्या से निपटने के लिए तालाब में जरूरत के हिसाब से चूने का छिड़काव करना सबसे बेस्ट उपाय माना जाता है. इसके साथ ही बरसात के दिनों में तालाब के पानी में ऑक्सीजन की कमी होना एक बहुत ही आम बात है.
जब आसमान में लगातार बादल छाए रहते हैं और धूप नहीं निकलती. तो पानी में ऑक्सीजन का लेवल गिर जाता है. ऐसे में मछलियां पानी की सतह पर आकर सांस लेने लगती हैं. इससे बचाव के लिए एरिएटर चलाना बेहद जरूरी हो जाता है.
इस मौसम में तालाब में बाहर का गंदा और दूषित पानी आने से रोकना सबसे बड़ा टास्क होता है. खेत या रास्तों से बहकर आने वाला गंदा पानी अपने साथ कई तरह के बैक्टीरिया और कचरा लेकर आता है. इस गंदे पानी की वजह से तालाब में फंगल इंफेक्शन और पूंछ सड़ने जैसी खतरनाक बीमारियां बहुत तेजी से फैलती हैं.
मछलियों को बीमारियों से सुरक्षित रखने के लिए जुलाई के महीने में पानी की समय-समय पर चेक करते रहना चाहिए. अगर पानी का रंग बहुत ज्यादा गहरा हरा या मटमैला दिख रहा है. तो समझ जाएं कि तालाब का माहौल बिगड़ रहा है. पानी को साफ रखने के लिए पोटैशियम परमैंगनेट या लाल दवा का इस्तेमाल करना फायदेमंद रहता है.
मछलियों के खान-पान को लेकर भी इस सीजन में खास सावधानी बरतनी पड़ती है. बरसात के दिनों में जब मौसम ज्यादा खराब हो या लगातार बारिश हो रही हो तो मछलियों को खाना देना थोड़ा कम कर देना चाहिए. दरअसल इस माहौल में मछलियां खाना कम खाती हैं और बचा हुआ भोजन पानी को तेजी से सड़ाने लगता है.