पत्तेदार सब्जियों की खेती में न करना ये गलती, खराब हो जाएगी पूरी फसल

पालक, धनिया, मेथी और सरसों जैसी पत्तेदार सब्जियां हर घर की रसोई का जरूरी हिस्सा हैं. यही वजह है कि कई किसान इनकी खेती करके अच्छी कमाई भी करते हैं. लेकिन अक्सर देखा गया है कि जानकारी की कमी की वजह से किसान भाई कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जिनका असर पूरी फसल पर पड़ता है. कई बार तो मेहनत और लागत दोनों बेकार चली जाती है. ऐसे में आइए जानते हैं पत्तेदार सब्जियों की खेती में होने वाली सबसे आम गलतियां, ताकि आप इनसे बचकर अच्छी पैदावार ले सकें.
सबसे पहली गलती होती है सही बीज का चुनाव न करना. कई किसान बिना सोचे-समझे कहीं से भी बीज खरीद लेते हैं, जबकि हर इलाके की मिट्टी और मौसम अलग होता है. अगर बीज उस जगह के हिसाब से सही नहीं है, तो पौधे कमजोर रहते हैं और बीमारी जल्दी पकड़ लेते हैं. इसलिए हमेशा प्रमाणित बीज भंडार से ही बीज खरीदना चाहिए और अपने इलाके के कृषि विशेषज्ञ से सलाह जरूर लेनी चाहिए.
पत्तेदार सब्जियों की जड़ें ज्यादा गहरी नहीं होतीं, इसलिए ऊपरी मिट्टी का उपजाऊ होना बहुत जरूरी है. कई किसान बुवाई से पहले खेत की सही जुताई नहीं करते और न ही मिट्टी में गोबर की खाद अच्छी तरह मिलाते हैं. इससे मिट्टी सख्त रह जाती है और पौधों की जड़ें ठीक से नहीं फैल पातीं. बुवाई से पहले खेत की दो से तीन बार जुताई करनी चाहिए और मिट्टी में पुरानी सड़ी हुई गोबर की खाद जरूर मिलानी चाहिए.
पानी देने में गड़बड़ी सबसे बड़ी समस्या है. कुछ किसान जरूरत से ज्यादा पानी दे देते हैं, जिससे जड़ें सड़ने लगती हैं और पौधे पीले पड़कर मरने लगते हैं. वहीं कुछ किसान पानी की कमी कर देते हैं, जिससे पत्तियां मुरझा जाती हैं और बढ़वार रुक जाती है. पत्तेदार सब्जियों में हल्की-हल्की सिंचाई बार-बार करनी चाहिए, न कि एक साथ ज्यादा पानी भर देना चाहिए. खासकर बारिश के मौसम में खेत में पानी जमा न होने दें.
बहुत से किसान जगह बचाने के चक्कर में बीज बहुत पास-पास बो देते हैं. इससे पौधों को हवा और धूप ठीक से नहीं मिल पाती, जिससे पौधे कमजोर रह जाते हैं और बीमारी फैलने का खतरा भी बढ़ जाता है. हर पत्तेदार सब्जी की एक तय दूरी होती है, जैसे पालक और मेथी में पौधों के बीच कम से कम चार से पांच सेंटीमीटर की दूरी रखनी चाहिए.
पत्तेदार सब्जियों में कीड़े-मकोड़े और बीमारियां बहुत जल्दी फैलती हैं, क्योंकि इनकी पत्तियां कोमल होती हैं. कई किसान शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं और तब तक इंतजार करते हैं जब तक पूरी फसल प्रभावित न हो जाए. पत्तियों पर धब्बे, छेद या पीलापन दिखते ही तुरंत कृषि विशेषज्ञ से सलाह लेकर सही दवा का छिड़काव करना चाहिए. समय पर खेत का निरीक्षण करने की आदत डालनी चाहिए.
कई किसान हर बार एक ही खेत में बार-बार एक जैसी सब्जी उगाते रहते हैं. इससे मिट्टी में मौजूद जरूरी पोषक तत्व कम होते जाते हैं और मिट्टी में बीमारियां भी जमा होने लगती हैं. इसका सीधा असर अगली फसल पर पड़ता है और पैदावार धीरे-धीरे कम होती जाती है. इसलिए हर सीजन में फसल बदलते रहना चाहिए, जैसे एक बार पत्तेदार सब्जी लगाने के बाद अगली बार दलहन या कोई और फसल लगानी चाहिए. इससे मिट्टी की सेहत बनी रहती है.
आखिरी और बहुत जरूरी गलती है कटाई में देरी करना या जल्दबाजी करना. अगर पत्तेदार सब्जी को सही समय पर नहीं काटा गया, तो पत्तियां सख्त हो जाती हैं और उनका स्वाद व पोषण दोनों कम हो जाते हैं. वहीं बहुत जल्दी कटाई करने से पैदावार कम मिलती है. हर सब्जी के पौधे का सही बढ़वार समय जानकर ही कटाई करनी चाहिए, ताकि ताजी और स्वादिष्ट सब्जी बाजार तक पहुंचे और किसान को अच्छा दाम भी मिले.