सादा अदरक छोड़ अब उगाएं काला अदरक, मार्केट में बिकता है इतने रुपये किलो

चाय का स्वाद बढ़ाना हो, दाल-सब्जी में तड़का लगाना हो या फिर सर्दी-खांसी की घरेलू दवा बनानी हो, अदरक हर भारतीय किचन का एक बेहद जरूरी हिस्सा है. सुबह की कड़क चाय से लेकर चटपटे खानों तक इसका इस्तेमाल रोज हर घर में किया जाता है.
बहुत से लोगों को यही लगता है कि अदरक सिर्फ एक ही तरह का होता है. जो हल्के पीले या भूरे रंग का बाजार में मिलता है. लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि सादा अदरक छोड़ अब किसान काला अदरक उगा रहे हैं. यह न केवल देखने में अलग है. बल्कि इसके गुण भी अलग है.
इसकी खेती अब मोटी कमाई का बेहतरीन मौका है जो किसी भी किसान की किस्मत बदल सकता है. काले अदरक की बाजार में भारी मांग है. अपनी एंटी-ऑक्सीडेंट और कमाल की खूबियों के कारण इसकी कीमत आम अदरक के मुकाबले कई गुना ज्यादा होती है. मार्केट में यह आसानी से 500 से 1000 रुपये प्रति किलो तक बिक जाता है.
इसकी खेती के लिए बहुत ज्यादा मुश्किल हालातों की जरूरत नहीं होती. इसे सामान्य अदरक की तरह ही उपजाऊ मिट्टी में आसानी से उगाया जा सकता है. हालांकि ड्रेनेज का सिस्टम बेहतर रखना जरूरी है जिससे खेतों में पानी न ठहरे. सही देखरेख से इसका उत्पादन अच्छा मिलता है.
खेती की शुरुआत करने के लिए अच्छी क्वालिटी के बीज या गांठों का चुनाव करें. इसे लगाने का सही समय बारिश के शुरू होने के आसपास होता है. कतारों में सही दूरी बनाए रखना जरूरी है जिससे पौधों को पनपने के लिए पूरी जगह मिले. अगर आप सही तरीके से बुवाई करते हैं तो फसल बीमारियों से बची रहती है.
पौधे जब बढ़ने लगें तो समय-समय पर निराई-गुड़ाई बहुत जरूरी है. कोशिश करें कि जैविक खाद का ज्यादा इस्तेमाल करें क्योंकि आजकल ऑर्गेनिक चीजों की मार्केट में डिमांड और कीमत दोनों बहुत ज्यादा हैं. केमिकल का कम इस्तेमाल करने से मिट्टी की सेहत भी हमेशा बनी रहती है.
फसल तैयार होने में थोड़ा समय लगता है आमतौर पर यह 8-9 महीने में कटाई के लिए तैयार होती है. जब पत्तियां पीली पड़कर सूखने लगें. तो समझ लीजिए कि खुदाई का समय आ गया है. पारंपरिक खेती से हटकर कुछ नया करने की सोच रहे लोगों के लिए काला अदरक एक सबसे बढ़िया ऑप्शन है.