अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दावा करते आ रहे हैं कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान युद्ध होने से बचा लिया. हालांकि, इसको लेकर भारत पहले ही साफ कर चुका है कि इसमें ट्रंप की कोई भूमिका नहीं है. इस बीच अमेरिकी विदेश विभाग की प्रवक्ता टैमी ब्रूस ने डोनाल्ड ट्रंप के सीजफायर वाले दावे पर बयान दिया है. उन्होंने न तो ट्रंप के दावे को स्पष्ट समर्थन दिया और न ही उसे पूरी तरह खारिज किया. उन्होंने दो टूक कहा कि इतनी सारी टिप्पणियां अपने आप में सब कुछ बयां कर देती है अब आप खुद तय करें कि क्या हुआ.
पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में 9 आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया. इसके बाद पाकिस्तानी सेना ने सीजफायर का उल्लघंन करते हुए भारतीय सैन्य ठिकानों पर हमले की कोशिश की, जिसे भारत ने नाकाम कर दिया. भारत ने जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तान के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया. पाकिस्तान के डीजीएमओ ने सीजफायर के लिए भारत को फोन लगाया. भारत बार-बार कहता आ रहा है कि सीजफायर में अमेरिका ने मध्यस्थता नहीं की.
भारत ने अमेरिका के दावे से क्यों किया इंकार?
भारत ने तीन मुख्य वजह दी है, जिससे साफ पता चलता है कि अमेरिका झूठी वाहवाही लूटने की कोशिश कर रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से 35 मिनट फोन पर बात की थी. उन्होंने ट्रंप को साफ तौर पर कहा था कि पाकिस्तान के साथ सीजफायर में आपका कोई रोल नहीं है. इसके अलावा विदेश मंत्री एस. जयशंकर ट्रंप के दावों को सीधे खारिज कर चुके हैं. भारत स्पष्ट कर चुका है कि वह किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को स्वीकार नहीं करता, खासकर जब बात राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता की हो.
पाकिस्तान ने क्यों दिखाया अमेरिका को लेकर समर्थन?
पाकिस्तान ने ट्रंप के सीजफायर वाले दावे का न केवल स्वागत किया, बल्कि उन्हें 2026 के नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नॉमिनेट भी कर दिया. पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने ट्रंप को शांति के दूत के रूप में पेश किया और कहा कि अमेरिका की पहल के बिना यह युद्धविराम संभव नहीं था.