अमेरिका ने चीन और अन्य प्रतिद्वंद्वियों को महत्वपूर्ण चिप निर्माण तकनीक तक पहुंचने से रोकने के उद्देश्य से बड़ा कदम उठाया है. कांग्रेस में अमेरिकी सीनेटरों ने उन्नत सेमीकंडक्टर निर्माण उपकरणों पर निर्यात नियंत्रण कड़ा करने के लिए विधेयक पेश किया.

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प्रस्तावित मल्टीलेटरल अलाइनमेंट ऑफ टेक्नोलॉजी कंट्रोल्स ऑन हार्डवेयर (MATCH) अधिनियम का उद्देश्य मौजूदा नियंत्रणों की कमियों को दूर करना और अमेरिका की तकनीकी बढ़त और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सहयोगी देशों के साथ नीतियों में समन्वय स्थापित करना है.

प्रतिनिधि जॉन डब्ल्यू. मैनियन ने कहा, 'अमेरिकी श्रमिकों, नवाचार और प्रतिभा ने दुनिया की सबसे एडवांस्ड सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री बनाई है. अमेरिका ग्लोबल मेमोरी चिप मैन्युफैक्चरिंग और रिसर्च की अगली पीढ़ी का नेतृत्व करने के लिए तैयार है, मैं उस भविष्य की रक्षा करने जा रहा हूं और यह सुनिश्चित करूंगा कि हम आगे रहें.' उन्होंने आगे कहा कि यह बिल उन टूल्स, तकनीक, नौकरियों और जानकारी की सुरक्षा करता है जो अमेरिका को चीन से आगे रखेंगे और 21वीं सदी की उन तकनीक में सबसे आगे रहेंगे, जिन पर दुनिया निर्भर है.

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यह कानून केंद्र सरकार को सेमीकंडक्टर प्रोडक्शन में खास 'चोकपॉइंट्स (समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के प्रमुख संकरे मार्ग)' की पहचान करने और सहयोगी देशों के साथ मिलकर एक जैसे एक्सपोर्ट कंट्रोल लगाने का निर्देश देता है. इसमें यह भी प्रस्ताव है कि अगर साझेदार देश अमेरिका की पाबंदियों का पालन नहीं करते हैं तो कार्रवाई की जाएगी.

इसके साथ ही एक और बिल है, जो सीनेटर पीट रिकेट्स और एंडी किम एक साथ ला रहे हैं. इसे सीनेटर जिम रिश और चक शूमर का समर्थन मिला है. सीनेटरों ने कहा कि मौजूदा एक्सपोर्ट कंट्रोल अभी भी बिखरे हुए हैं और अक्सर बिचौलियों के जरिए उन्हें नजरअंदाज कर दिया जाता है. सीनेटर रिकेट्स ने कहा, 'सेमीकंडक्टर को डिजाइन करने और बनाने की क्षमता कम्युनिस्ट चीन के साथ टेक्नोलॉजी कॉम्पिटिशन के केंद्र में है.'

उन्होंने कहा कि मौजूदा नियम इकाई-आधारित प्रतिबंधों का ऐसा ढांचा हैं, जिसे चीन आसानी से फ्रंट कंपनियों के जरिए दरकिनार कर देता है. यह बिल हमारे कंट्रोल को मजबूत करेगा और अमेरिकी कंपनियों के लिए बराबरी का मौका बनाएगा. सीनेटर एंडी किम ने कहा कि इस कोशिश का मकसद सबसे एडवांस्ड सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग इक्विपमेंट को चीन और दूसरे दुश्मनों के हाथों से दूर रखना है. उन्होंने सहयोगी देशों के साथ तालमेल की जरूरत पर जोर दिया.

एमएटीसीएच एक्ट में डीप अल्ट्रावॉयलेट लिथोग्राफी इक्विपमेंट समेत जरूरी चिप बनाने वाले टूल्स पर पूरे देश में रोक लगाने का प्रस्ताव है. इसके तहत हुआवेई, एसएमआईसी और यांग्त्जी मेमोरी टेक्नोलॉजीज जैसी प्रमुख चीनी कंपनियों के संयंत्रों को प्रतिबंधित इकाइयों के रूप में चिह्नित कर निशाना बनाया गया है.

कांग्रेसी माइकल बॉमगार्टनर ने चेतावनी दी,, 'अमेरिका ऐसे कोई भी पीछे के दरवाजे खुले नहीं छोड़ सकता जिससे चीनी कम्युनिस्ट पार्टी को सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग में आगे बढ़ने के लिए जरूरी टूल्स मिल सकें.' लॉमेकर्स ने तर्क दिया कि अमेरिका और सहयोगी एक्सपोर्ट सिस्टम के बीच गैप की वजह से चीनी कंपनियों को पाबंदियों के बावजूद जरूरी टेक्नोलॉजी तक पहुंचने का मौका मिला है.

बिल में ऐसे नियम शामिल हैं जिनसे अगर सहयोगी तय समय में साथ नहीं आते हैं, तो अमेरिकी टेक्नोलॉजी पर निर्भर विदेश में बनी चीजों पर अमेरिका का अधिकार क्षेत्र बढ़ाया जा सकता है. समर्थकों का कहना है कि यह कानून आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग में अमेरिका के लीडरशिप को बनाए रखने के लिए जरूरी है. बिल का समर्थन करने वाले विश्लेषक ने कहा कि कंट्रोल में गैप की वजह से चीन को बड़ी मात्रा में एडवांस्ड इक्विपमेंट हासिल करने का मौका मिला है.

रयान फेडासियुक ने कहा, 'चीन इस अंतर का लगातार फायदा उठा रहा है.' उन्होंने यह भी बताया कि सहयोगी देशों के नियंत्रण हमेशा उसी तरह लागू नहीं होते. यह कदम घरेलू सेमीकंडक्टर प्रोडक्शन को मजबूत करने और सप्लाई चेन को सुरक्षित करने के लिए कांग्रेस की पहले की कोशिशों पर आधारित है. यह चिप बनाने में चीन की तेजी से हो रही तरक्की और रक्षा और जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर पर इसके असर को लेकर वाशिंगटन में बढ़ती चिंता को भी दिखाता है.

सेमीकंडक्टर को एआई, डिफेंस सिस्टम और ग्लोबल सप्लाई चेन का समर्थन करने वाली एक रणनीतिक तकनीक के तौर पर देखा जाता है. अमेरिका ने हाल के सालों में चीन की एडवांस्ड चिप्स और मैन्युफैक्चरिंग इक्विपमेंट तक पहुंच को धीमा करने के लिए कई बार एक्सपोर्ट कंट्रोल लगाए हैं. अमेरिका और उसके सहयोगियों की नीतियों में मतभेद एक बड़ी चुनौती बने हुए हैं, जिसके चलते कांग्रेस में तकनीक पर नियंत्रण के लिए अधिक समन्वित और बहुपक्षीय दृष्टिकोण अपनाने की मांग तेज हो गई है.

 

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