क्यूबा सरकार ने गुरुवार (2 अप्रैल) को घोषणा की कि उन्होंने 2,010 लोगों को क्षमादान दिया है. ये घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब ठीक उसी समय अमेरिका का ट्रंप प्रशासन सरकार पर अत्यधिक दबाव डाल रहा है और तेल नाकाबंदी के जरिए आईलैंड का दम घोंट रहा है. 

Continues below advertisement

क्यूबा की सरकार ने क्या कहान्यूज एजेंसी AP की रिपोर्ट के मुताबिक क्यूबा सरकार ने कहा कि ये क्षमादान पवित्र सप्ताह के अवसर पर एक मानवीय कदम था. हालांकि उन्होंने अमेरिका के साथ बढ़ते दबावों का कोई जिक्र नहीं किया है. क्यूबा की सरकार ने कहा कि उन्होंने विदेशियों और क्यूबावासियों को रिहा किया है, जिनमें महिलाएं, बुजुर्ग और युवा शामिल हैं. क्यूबा के अधिकारियों ने यह नहीं बताया कि किन लोगों को रिहा किया गया और किन शर्तों पर किया गया है. 

क्षमादान पाने वालों की कोई जानकारी नहींइसके अलावा जिन लोगों को रिहा किया गया है, उनके अपराधों का भी कोई जिक्र नहीं किया गया है. अधिकारियों ने यह भी जानकारी नहीं दी है कि क्षमादान पाने वालों में से कोई आतंकवाद, अवमानना ​​या सार्वजनिक अव्यवस्था के लिए दोषी ठहराए गए और सजा पाए प्रदर्शनकारी थे या नहीं. क्यूबा सरकार राजनीतिक कैदियों को मान्यता नहीं देती है, लेकिन कार्यकर्ता समूह प्रिज़नर्स डिफेंडेड ने क्यूबा में राजनीतिक कारणों से जेल में बंद 1,214 लोगों को पंजीकृत किया है.

Continues below advertisement

व्हाइट हाउस का बयानव्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने हाल ही में कहा कि अमेरिका क्यूबा के लिए तेल शिपमेंट के मामले का मानवीय आधार पर मूल्यांकन करेगा. उन्होंने यह जवाब उस प्रश्न पर दिया, जिसमें उनसे ये पूछा गया था कि अमेरिकी तटरक्षक ने कच्चे तेल से भरे एक रूसी टैंकर को क्यूबा पहुंचने की अनुमति क्यों दी, जबकि वह दूसरे देशों को ऐसा करने से रोक रहा है. 

लेविट ने आगे कहा कि मानवीय कारणों या अन्य वजहों से मामले दर मामले का मूल्यांकन किया जाएगा पर हमारी प्रतिबंध नीति में कोई बदलाव नहीं आया है. ट्रंप प्रशासन ने क्यूबा की कम्युनिस्ट सरकार को झुकने के लिए मजबूर करने की रणनीति के तहत जनवरी से इस देश के लिए तेल शिपमेंट को रोक दिया है.

ये भी पढ़ें 

'बयान बदलकर फैला रहे हैं भ्रम', मैक्रों ने डोनाल्ड ट्रंप पर साधा निशाना, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर कही ये बात