हिंद महासागर में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच अमेरिका के ईरानी युद्धपोत को डुबोए जाने की घटना ने भारत की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर चिंता बढ़ा दी है. ये हमला श्रीलंका के दक्षिणी तट के पास अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में हुआ, जो श्रीलंका के खोज और बचाव क्षेत्र के दायरे में आता है. 

Continues below advertisement

अलजजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने श्रीलंका के जलक्षेत्र की ओर बढ़ते दूसरे युद्धपोत की पुष्टि की है. श्रीलंकाई सरकार के प्रवक्ता नलिंदा जयतिस्सा ने पुष्टि करते हुए कहा कि एक दूसरा ईरानी युद्धपोत श्रीलंका के क्षेत्रीय जलक्षेत्र की ओर बढ़ रहा है, उसी क्षेत्र की ओर जहां कल एक अमेरिकी पनडुब्बी ने एक ईरानी फ्रिगेट को नष्ट कर दिया था.

श्रीलंकाई सरकार ने क्या बताया?

Continues below advertisement

जयतिस्सा ने बताया कि युद्धपोत जिसमें कथित तौर पर 100 से अधिक चालक दल सवार हैं, श्रीलंका के जलक्षेत्र के ठीक बाहर है. यह बयान श्रीलंका के मंत्रिमंडल के प्रवक्ता के उस बयान के बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि देश अपने तट के पास एक ईरानी जहाज पर सवार लोगों की जान बचाने की कोशिश कर रहा है. अमेरिकी पनडुब्बी ने बुधवार (4 मार्च) को श्रीलंका के तट के पास अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में एक ईरानी युद्धपोत को टॉरपीडो से डुबो दिया था.

क्या बोले श्रीलंकाई सांसद नमल राजपक्षे?

श्रीलंका की नेवी ने बताया कि उन्होंने डूबते जहाज से 32 ईरानी नाविकों को बचाया, जबकि बड़ी संख्या में चालक दल अब भी लापता है. इस पूरे मामले को लेकर श्रीलंका के सांसद नमल राजपक्षे ने कहा कि यह श्रीलंका के लिए गंभीर चिंता का विषय है और हिंद महासागर के लिए भी. मुझे यकीन है कि भारत के लिए भी चिंता की बात है. उन्होंने आगे कहा कि युद्ध मीलों दूर हो रहा है, लेकिन हम हिंद महासागर में ऐसी हलचल देख रहे हैं जो श्रीलंका के तट से केवल 40 समुद्री मील दूर है.

ये भी पढ़ें- US Israel Iran War Live: मिडिल ईस्ट में छिड़ी जंग पर PM मोदी ने तोड़ी चुप्पी, बोले- 'मिलिट्री कॉन्फ्लिक्ट से समाधान नहीं...'