अमेरिकी सेना ने ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) के मुख्यालय को बड़े पैमाने पर नष्ट करने की पुष्टि की है. अमेरिकी केंद्रीय कमान (CENTCOM) ने कहा कि पिछले 47 सालों से IRGC 1,000 से अधिक अमेरिकियों की मौत के लिए जिम्मेदार था.

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सेंटकॉम ने इस कार्रवाई को सांप का सिर काटना बताया और कहा कि अमेरिका के पास दुनिया की सबसे शक्तिशाली सेना है और अब IRGC का कोई मुख्यालय नहीं है. CENTCOM ने अपने बयान में कहा कि रविवार (1 मार्च) को अमेरिका ने एक बड़ा हमला कर इस संगठन का सफाया कर दिया है क्योंकि अमेरिका के पास दुनिया की सबसे ताकतवर फौज है.

इजरायली सेना ने अपने बयान में क्या कहाइजरायली सेना ने भी दर्जनों ईरानी सैन्य कमान केंद्रों पर हमले किए, जिनमें आईआरजीसी के मुख्यालय, खुफिया मुख्यालय, आईआरजीसी वायुसेना कमान केंद्र और आंतरिक सुरक्षा मुख्यालय भी शामिल हैं. इजरायली बयान के अनुसार इन हमलों से ईरान की कमान और नियंत्रण क्षमताओं को गंभीर झटका लगा, क्योंकि इन सब जगहों पर तैनात कर्मियों को मार गिराया गया.

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की शनिवार (28 फरवरी) को हुई मौत के बाद रविवार को भी अमेरिका इजरायल ने मिलकर ईरान में बड़े पैमाने पर हमले किए. रविवार रात तेहरान में कई विस्फोट हुए. अमेरिका-इजरायल के हमलों में न सिर्फ खामेनेई बल्कि उनके परिवार के भी कई सदस्यों की जान गई है.

अभी किसके हाथों में ईरानी शासन की बागडोरइजरायल ने कहा कि उनके हमलों का निशाना राजधानी तेहरान का केंद्र था. ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए इजरायल, खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों, सऊदी अरब की राजधानी और दुबई पर कईं मिसाइलें दागीं और ड्रोन से हमला किया. इससे पहले रविवार को ईरान ने 66 वर्षीय धर्मगुरु अलीरेजा अराफी को तीन सदस्यीय नेतृत्व परिषद में नियुक्त किया, जिसे ईरान के नए सर्वोच्च नेता के चुने जाने तक देश का शासन चलाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है. 

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