US Iran conflict:  मिडिल ईस्ट में जारी जंग के बीच अमेरिका ने पहली बार साफ संकेत दिया है कि ईरान के खिलाफ उसका सैन्य अभियान ज्यादा लंबा नहीं चलेगा. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि यह ऑपरेशन “महीनों नहीं, बल्कि हफ्तों” में खत्म हो सकता है और इसके लिए जमीनी सेना उतारने की जरूरत नहीं पड़ेगी. फ्रांस में जी7 देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद रुबियो ने कहा कि अमेरिका अपने तय लक्ष्यों को समय से पहले या उसके आसपास हासिल कर सकता है. हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि कुछ अमेरिकी सैनिकों को इलाके में तैनात किया जा रहा है, ताकि जरूरत पड़ने पर विकल्प खुले रहें.

Continues below advertisement

मरीन और एयरबोर्न सैनिकों की तैनाती शुरू

अमेरिकी विदेश मंत्री ने भले ही जमीनी युद्ध से इनकार किया हो, लेकिन पेंटागन ने हजारों मरीन और एयरबोर्न सैनिकों को मिडिल ईस्ट भेजना शुरू कर दिया है. जानकारी के मुताबिक, सैनिकों का पहला दल इसी मार्च के अंत तक एक बड़े एम्फीबियस जहाज के जरिए पहुंचने वाला है. इससे यह आशंका बढ़ गई है कि अगर हालात बिगड़े तो जंग जमीनी स्तर तक फैल सकती है.

Continues below advertisement

ट्रंप का अल्टीमेटम, 10 दिन की डेडलाइन

इस बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी इस जंग को जल्द खत्म करने के संकेत दे रहे हैं. उन्होंने ईरान को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने के लिए 10 दिन की नई समय सीमा दी है. साथ ही चेतावनी दी है कि ऐसा न होने पर ऊर्जा ढांचे पर हमला किया जा सकता है. ट्रंप प्रशासन ने पाकिस्तान के जरिए ईरान को 15 सूत्रीय प्रस्ताव भी भेजा है, जिसमें यूरेनियम संवर्धन रोकने और मिसाइल कार्यक्रम सीमित करने जैसी शर्तें शामिल हैं.

ईरान ने बातचीत से किया इनकार

हालांकि तेहरान ने अब तक इन प्रस्तावों को ठुकरा दिया है. ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि हमलों के बीच बातचीत करना अस्वीकार्य है और ईरान इसका भारी जवाब देगा. इस जंग का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है. ईरान में अब तक 1900 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और 20 हजार से अधिक लोग घायल हो चुके हैं. वहीं अमेरिका के 300 से ज्यादा सैनिक घायल हुए हैं और 13 की मौत हो चुकी है.