अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने बुधवार को रूस के अधिकारियों और उसकी अर्थव्यवस्था के प्रमुख क्षेत्रों को निशाना बनाने वाले व्यापक प्रतिबंध बिल को मंजूरी दे दी. ये बिल राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भारत और चीन जैसे देशों पर रूस से तेल या गैस खरीदने पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार देता है.

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यह बिल दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम के नाम पर है, जिन्होंने इस पर एक साल से ज्यादा समय तक काम किया था. बिल का उद्देश्य रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को यूक्रेन के खिलाफ युद्ध के लिए जरूरी आर्थिक संसाधनों से वंचित करना है. अब यह बिल राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास भेजा गया है.

बिल को मिली मंजूरी

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अमेरिकी कांग्रेस के हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने रूस और ईरान पर नए प्रतिबंध लगाने वाले व्यापक बिल को 262-159 वोट से मंजूरी दे दी है। बिल का आधिकारिक नाम ‘Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026’ है. इससे पहले अमेरिकी सीनेट ने अगस्त में इस बिल को 86-11 वोट से मंजूरी दी थी. बिल पास होने के बाद अमेरिकी सांसद माइकल मैककॉल ने कहा कि उन्हें इस बिल के पारित होने पर गर्व है.

मैककॉल ने दावा किया कि यह बिल रूस की युद्ध क्षमता को कमजोर करेगा और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को बातचीत की मेज पर लाने में मदद करेगा. उन्होंने कहा कि बिल रूस के साथ-साथ चीन और ईरान पर भी दबाव बढ़ाने के लिए है. मैककॉल ने दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम के उस बयान का भी जिक्र किया, जिसमें ग्राहम ने कहा था कि उनके पास युद्ध खत्म करने का फॉर्मूला होने को लेकर वह पहले से ज्यादा आशावादी हैं.

भारत-चीन पर लगेगा 100 परसेंट टैरिफ?

अब बिल राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास हस्ताक्षर के लिए भेजा गया है. इसके कानून बनने के बाद रूस की ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र पर प्रतिबंध बढ़ाने के साथ-साथ रूस से तेल-गैस खरीदने वाले कुछ देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार राष्ट्रपति को मिल सकता है. इसमें भारत और चीन जैसे बड़े खरीदार भी शामिल हो सकते हैं.

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