इस्लामाबाद: पैसों की कमी से जूझ रहे इमरान ख़ान के पाकिस्तान को बेलआउट की संजीवनी मिली है. देश को कोई छोटी-मोटी रकम नहीं बल्कि तीन बिलियन डॉलर (4,20,94,50,00,000.00 पाकिस्तानी रुपए) का बेलआउट मिला है. भारत के इस पड़ोसी मुल्क को इतनी बड़ी रकम का बेलआउट देने वाला कोई और नहीं बल्कि भारत का एक और मित्र देश यूएई है. कैश और डॉलर की कमी से जूझ रहे पाकिस्तान के लिए ये बेलआउट बड़ी राहत लेकर आएगा.

यूएई ने इसकी घोषणा पिछले साल तीन दिसंबर को ही की थी. पहले सऊदी अरब ने पाक को इतनी ही बड़ी रकम देने की बात कही जिसके बाद यूएई ने भी ऐसे ही वादा किया. दोनों देशों ने ये पेशकश इसलिए की थी ताकि पाकिस्तान बैलेंस ऑफ पेमेंट के संकट से बाहर आ सके. वहीं, इस रकम के सहारे ये दोनों देश पाकिस्तान को इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड के कठिन नियमों वाले बेलआउट से भी बचाना चाहते हैं.

ये ताज़ा समझौता स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान और आबू धाबी फंड डेवलपमेंट के बीच साइन किया गया है. पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मोहम्मद फैसल ने मामले पर ट्वीट करके कहा, "यूएई ने बैंक ऑफ पाकिस्तान को औपचारिक रूप 3 बिलियन डॉलर दे दिए है." उन्होंने कहा कि ये समझौता पाकिस्तान को आर्थिक स्थिरता हासिल करने में मदद करेगा. उन्होंने लंबे समय से पाक की अर्थव्यवस्था संभालने में मिली यूएई की मदद का भी ज़िक्र किया.

यूएई ने अपने बयान में कहा कि इस मदद के जरिए यूएई पाकिस्तान में आर्थिक स्थिरता को बहाल करने में अपने नेतृत्व की भूमिका निभाना चाहता है. यूएई ने दोनों देशों के बीच 1981 से भी मज़बूत संबंध होने पर भी बल दिया. ये भी कहा गया कि ये फंड पाकिस्तान को सामाजिक और आर्थिक मज़बूती देने में मदद करेगा. यूएई ने पाकिस्तान के पीएम इमरान खान के उनके देश के दौरे के दौरान इस मदद का वादा किया था. ये दौरा पिछले महीने हुआ था.

इसके तहत पाकिस्तान और यूएई के बीच 15 साल के एलएनजी सप्लाई का करार हुआ है. आपको बता दें कि भारत के भी अच्छे मित्रों में शामिल सऊदी अरब और यूएई ने पाकिस्तान को बैलेंस ऑफ पेमेंट के संकट से पार पाने में खासी मदद की है. पाकिस्तान के सरकारी अधिकारियों के मुताबिक 2017-18 वित्त वर्ष में पाकिस्तान के बैलेंस ऑफ पेमेंट की कमी 12 बिलियन डॉलर (16,83,78,00,00,000.00 पाकिस्तानी रुपए) की है.

रूस की एक सरकारी कंपनी ने नकदी संकट से जूझ रहे पाकिस्तान के जल और बिजली क्षेत्रों में दो अरब डॉलर का निवेश करने की पेशकश की है. मीडिया की खबरों में बृहस्पतिवार को कहा गया है कि रूसी कंपनी ने सरकार से सरकार आधार पर यह निवेश करने की पेशकश की है.

रूस ने जताई भारी निवेश की इच्छा रूस की सार्वजनिक क्षेत्र की सबसे बड़ी ऊर्जा कंपनियों में से एक इंटर आरएओ इंजीनियरिंग के प्रतिनिधियों ने नवंबर में पाकिस्तान के जल एवं बिजली विकास प्राधिकरण के अधिकारियों के साथ मुलाकात की थी और दो अरब डॉलर का निवेश करने की पेशकश की थी. ‘द एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ की खबर के अनुसार कंपनी ने 800 मेगावॉट की मोहमंद बांध परियोजना में भी निवेश की इच्छा जताई है.

हालांकि, अभी तक रूसी कंपनी को पाकिस्तान की ओर से इस बारे में कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है. बताते चलें कि नकदी संकट से जूझ रहा पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष से आठ अरब डॉलर के राहत पैकेज के लिए बातचीत कर रहा है, जिससे वह अपने गंभीर भुगतान संतुलन संकट से उबर सके.

'इमरान मांग रहे भीख़' आपको बता दें कि इसके पहले पाकिस्तान के सिंध प्रांत के मुख्यमंत्री मुराद अली शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री इमरान खान नकदी के संकट से जूझ रहे अपने देश के लिए दुनियाभर में घूमकर वित्तीय मदद की भीख मांग रहे हैं. बदीन के मातली में एक रैली को संबोधित करते हुए पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के नेता शाह ने कहा, "इमरान खान (आर्थिक मदद की) भीख मांगने के लिए एक देश से दूसरे देश जा रहे हैं."

लोन बढ़ने के कारण पाकिस्तान पर बैलेंस ऑफ पैमेंट का क्राइसिस हो गया है जिससे वहां की अर्थव्यवस्था काफी कमजोर हो गई है.  यूएई के द्वारा कुल सहायता राशि कैश में नहीं दी जाएगी. सहायता की कुछ रकम कैश और कुछ आयातित तेल के दाम बाद में चुकाने के रूप में दी जाएगी. यूएई ने पाकिस्तान को जिस तरह की मदद दी है उसी तरह की मदद सऊदी अरब ने पाकिस्तान को इससे पहले दी है.

यूएई के द्वारा दिए जाने वाले पैकेज को अंतिम रूप दे दिया गया है जिसके बारे में पाकिस्तान के एक कैबिनेट मंत्री ने जानकारी दी. पाकिस्तान को सऊदी अरब और यूएई से जितनी रकम की मदद दी गई है वह पाकिस्तान के कुल तेल आयात का 60 प्रतिशत है. तेल आयात के रूप में इतनी बड़ी रकम के तत्काल खर्च से छूट मिलने से पाकिस्तान अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान कर पाएगा. इससे पहले चीन ने भी बीआरआई के तहत पाकिस्तान को आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है.

हालांकि, चीन कितने करोड़ रुपए की मदद पाकिस्तान को देगा अभी इस बारे में कोई जानकारी नहीं है. वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हर हाल में यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि आईएमएफ से मिलने वाले लोन से पाकिस्तान चीन को अपना कर्जा ना चुका पाए. अमेरिका का मानना है कि चीन का पाकिस्तान पर बड़ा कर्ज वहां की अर्थव्यवस्था की कमजोरी के लिए जिम्मेदार है.

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