विश्व राजनीति में ‘राष्ट्रीय सम्मान’ की अहमियत पर इजरायली सुरक्षा नीति विशेषज्ञ जाकी शालोम ने टिप्पणी की है. उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृढ़ रुख को उदाहरण बताते हुए कहा कि भारत ने अमेरिका और पाकिस्तान के सामने अपने राष्ट्रीय सम्मान की रक्षा करते हुए सबक दिया है. शालोम ने यह बात द जेरूसलम पोस्ट में प्रकाशित एक लेख में कही है. भारत का दृढ़ रुख बना मिसालइजरायली सुरक्षा नीति विशेषज्ञ जाकी शालोम के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अमेरिका के साथ टैरिफ नीति पर सख्त रुख और पाकिस्तान के साथ सीमाई टकराव पर स्पष्ट प्रतिक्रिया यह दर्शाती है कि “राष्ट्रीय सम्मान कोई लग्जरी नहीं, बल्कि एक दूरगामी रणनीतिक संपत्ति है.”
हाल के महीनों में भारत-अमेरिका संबंध तनावपूर्ण हो गए हैं, क्योंकि अमेरिका ने भारत पर रूस से तेल आयात के लिए भारी टैरिफ लगा दिए. मोदी सरकार ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा की गई युद्धविराम बातचीत की दावे को भी पूरी तरह खारिज कर दिया. शालोम ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने चार बार राष्ट्रपति ट्रंप के कॉल भी अनसुने किए. इजरायल की प्रतिक्रिया पर आलोचनाशालोम ने इजरायल सरकार और सेना की गाजा के नासेर हॉस्पिटल पर बमबारी के बाद की गई “आत्ममुग्ध” प्रतिक्रिया की आलोचना की. इस हमले में कम से कम 20 नागरिक मारे गए थे. उन्होंने कहा कि इजरायली रक्षा बल (IDF), सेना प्रमुख और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के अलग-अलग बयानों से ऐसा संदेश गया कि वे निष्पक्ष नागरिकों की हत्या की जिम्मेदारी को स्वीकार कर रहे हैं. उनके अनुसार, इस तरह की प्रतिक्रिया अंतरराष्ट्रीय कानून के लिहाज से खतरनाक मिसाल बन सकती है.
राष्ट्रीय सम्मान की रणनीतिक अहमियतशालोम ने कहा कि जब भारत को अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से अप्रत्याशित आलोचना का सामना करना पड़ा, तो प्रधानमंत्री मोदी ने झुकने की बजाय मजबूती से जवाब दिया और राष्ट्रीय सम्मान की रक्षा की. उन्होंने समझाया कि यह सख्त प्रतिक्रिया भारत को किसी अधीनस्थ राष्ट्र के रूप में स्वीकार नहीं करने का स्पष्ट संदेश थी.
इजरायल के खान यूनिस हमले के समय अत्यधिक पारदर्शिता और चिंता का रवैया अपनाना अल्पकालिक नुकसान को कम कर सकता है, लेकिन दीर्घकालिक रणनीतिक हितों को नुकसान पहुंचाता है. शालोम ने निष्कर्ष निकाला कि किसी भी देश को मुश्किल हालात में भी अपने राष्ट्रीय सम्मान की रक्षा करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि भारत से हम यह सीखते हैं कि राष्ट्रीय सम्मान कोई लग्जरी नहीं, बल्कि रणनीतिक संपत्ति है. अगर इजरायल अपनी सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय स्थान को मजबूत करना चाहता है, तो उसे पूरी मजबूती से अपनी स्थिति पेश करनी होगी.