Israel-Hamas War: गाजा पट्टी में सोमवार (26 मई) को इजरायली सेना में हवाई हमला किया. इस दौरान इजरायली सेना ने एक स्कूल को निशाना बनाया, जो विस्थापित लोगों के लिए होम शेल्टर के रूप में इस्तेमाल हो रहा था. AP की रिपोर्ट के मुताबिक इस हमले में कम से कम 46 लोगों की मौत हुई, जिनमें 31 लोग उस स्कूल में मारे गए, जहां लोग सो रहे थे. स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, बमबारी के कारण लोगों के सामान में आग लग गई और कई लोगों की जलकर मौत हो गई. इजरायली सेना ने दावा किया है कि स्कूल से हमास के लोग काम कर रहे थेऔर इसी कारण उसे निशाना बनाया गया.

इजरायल ने मार्च में हमास के साथ युद्धविराम समाप्त करने के बाद गाजा में सैन्य कार्रवाई दोबारा शुरू की थी. इजरायली सरकार का कहना है कि वह तब तक युद्ध जारी रखेगी, जब तक गाजा पर नियंत्रण नहीं पा लेती और हमास का पूरी तरीके से सफाया नहीं हो जाता. उनका मकसद है हमले में बचे 58 बंधकों को वापस लाना, जिसके लिए वह लगातार हमला कर रहे हैं. सरकारी रिपोर्टों के अनुसार, उन बंधकों में से केवल एक तिहाई के जिंदा होने की संभावना है, लेकिन इजरायल ने उन्हें वापस लाने का संकल्प लिया है.

मानवीय सहायता के रूप में नाम मात्र की राहतलगभग ढाई महीने तक पूर्ण प्रतिबंध के बाद इजरायल ने पिछले सप्ताह गाजा में सीमित मानवीय सहायता की अनुमति दी. इसमें खाद्य पदार्थ, दवाइयां और ईंधन जैसी जरूरी चीजें शामिल थीं, लेकिन सहायता समूहों का कहना है कि यह राहत बढ़ती ज़रूरतों के मुकाबले बेहद कम है. इस वजह से अकाल जैसी स्थिति की आशंका गहरा रही है.

विवादास्पद नई सहायता प्रणालीएक नई सहायता वितरण प्रणाली, जिसे इजरायल और अमेरिका का समर्थन प्राप्त है. वह सोमवार से शुरू होनी थी, लेकिन संयुक्त राष्ट्र और प्रमुख NGO समूहों ने इसे अस्वीकार कर दिया है. इस प्रयास का नेतृत्व करने वाले अमेरिकी अधिकारी ने इस्तीफा दे दिया, यह कहते हुए कि यह स्वतंत्र रूप से काम करने में सक्षम नहीं है. इस हमले ने दुनियाभर में मानवाधिकार संगठनों और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की चिंता को फिर से जगा दिया है. स्कूलों और आश्रयों पर हमले को लेकर संयुक्त राष्ट्र पहले ही कई बार चिंता जता चुका है. बच्चों, महिलाओं और आम नागरिकों की मौतें इस बात का संकेत देती हैं कि यह सिर्फ दो सैन्य ताकतों की लड़ाई नहीं रही, बल्कि एक मानवीय संकट में तब्दील हो चुकी है.