इजरायल चुनाव में मौजूदा प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अपनी गठबंधन सरकार का संसदीय बहुमत खो दिया है. इधर, नेतन्याहू का विरोध कर रही यहूदी दलों के गुट को भी नेसेट का बहुमत नहीं मिल सकता है. इससे इजरायल में नई सरकार बनाने का कोई स्पष्ट रास्ता नहीं बचा है. ऐसे में इजरायल के राष्ट्रपति आइजैक हर्जोग ने कहा हैकि उन्हें बुधवार को औपचारिक चुनाव के परिणाम मिलेंगे. वे सरकार बनाने के लिए राजनीतिक पार्टियों से चर्चा भी करेंगे. 

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अगले कुछ दिन इजरायल में राजनीतिक खींचतान देखने को मिल सकती है. यहां अलग-अलग गुट सरकार बनाने का दावा कर रहे हैं. इनमें विरोधी गुटों को मिलाकर एकजुट सरकार या बाहरी समर्थन पर टिकी अल्पसंख्यक सरकार जैसे विकल्प शामिल हैं. अगर किसी तरह के समझौते पर नहीं पहुंचा जाता है तो इजरायल में फिर से चुनाव हो सकते हैं.

फिलहाल क्या कहते हैं, चुनावी परिणाम?

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इधर, इजरायल के चुनाव नतीजों पर नजर डालें तो नेतन्याहू के समर्थक वाले गठबंधन ने कुल 53 सीटें ही जीती हैं. लिकुड को 27, यूनाइटेड टोरा जुडाइज्म को 7, ओत्जमा येहुदित को 7, शास को 6, रिलिजियस जायनिज्म को 6 सीटें मिली हैं. हालांकि यह गठबंधन बहुमत से काफी दूर है. 

इसके अलावा विरोधी पार्टियों ने कुल 48 सीटें जीती हैं. इनमें यशार को 21, ब्याचद को 12, द डेमोक्रेट्स को 8, यिसराएल बेतेनु को 7, अरब नेतृत्व वाली पार्टियों को 19 सीटे मिली हैं. इनमें जॉइंट लिस्ट को 11, और राअम को 8 सीटें मिली हैं. 

यानी कि साफ है कि किसी के पास नेसेट का बहुमत नहीं है. ऐसे में पार्टियों को अपनी गुटबंदी बदलना होगी. अब आगे आधिकारिक तौर पर चुनाव के नतीजों को प्रमाणित किया जाएगा. इसे 4 नवंबर को राष्ट्रपति इसाक हर्जोग के सामने रखा जाएगा.

अब आगे क्या होगा? 

नई नेसेट का शपथग्रहण 10 नवंबर को होना है. हर्जोग 11 नवंबर तक नेसेट के किसी सदस्य को नई सरकार बनाने की जिम्मेदारी सौंपनी होगी. ऐसे में उम्मीद है कि वे पार्टी नेताओं से सलाह मशवरा कर एक स्थायी फैसला लेंगे. ऐसे नेता को चुना जा सकता है, जो गठबंधन के लिए उपयुक्त साबित हो सके.