इजरायल में मतदान खत्म हो चुके हैं. इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने यरूशलेम के कन्वेंशन सेंटर में लोगों को संबोधित किया. उन्होंने कहा कि एग्जिट पोल के अनुसार, अगली संसद में उनकी पार्टी लिकुड सबसे बड़ी पार्टी होगी. उन्होंने पिछले 3 सालों में इजरायल की सैन्य उपलब्धियों का जिक्र किया. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ अपने संबंधों के बारे में भी उन्होंने बात की. उन्होंने ईरान की सत्ता के खिलाफ अपना काम पूरा करने का संकल्प लिया.

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नेतन्याहू ने एक नई सरकार बनाने का वादा किया है.  उन्होंने कहा कि किसी भी नेता को इजरायली अरबों के समर्थन से सरकार नहीं चलानी चाहिए, क्योंकि उनकी पार्टियों ने इस चुनाव में काफी अच्छा प्रदर्शन किया है. नेतन्याहू ने समर्थकों से कहा, "हमें दक्षिणपंथी विचारधारा वाली एक मजबूत सरकार बनानी होगी."

हालांकि, एग्जिट पोल के मुताबिक अरब-नेतृत्व वाली पार्टियां किंगमेकर की भूमिका निभा सकती है. एग्जिट पोल के मुताबिक नेतन्याहू का गुट और उनके विरोधी लगभग बराबरी पर हैं. दोनों ही अपने दम पर गठबंधन सरकार बनाने की स्थिति में नहीं हैं.

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ईरान के खिलाफ नेतन्याहू का बयान

नेतन्याहू ने कहा कि यहूदी और ज़ायोनी बहुसंख्यकों को एकजुट होना चाहिए. ऐसी सरकार का तो सवाल ही नहीं उठता, जिसे अरब पार्टियों का समर्थन हासिल हो. प्रधानमंत्री ने कहा कि वह ईरान से पैदा हुए खतरे को खत्म करने के लिए ट्रंप के साथ मिलकर काम करेंगे. इजरायल के पास ईरान से जुड़े खतरे को हमेशा के लिए खत्म करने का एक बेहतरीन मौका है.

एग्जिट पोल क्या कहते हैं?

तीन प्रमुख टीवी चैनलों की तरफ से जारी किए गए एग्जिट पोल बताते हैं कि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के समर्थन में थोड़ी बढ़ोतरी हुई है, लेकिन फिर भी वे सरकार बनाने के लिए जरूरी बहुमत से पीछे हैं. एग्जिट पोल के अनुसार, नेतन्याहू की 'लिकुड' पार्टी संसद में लगभग 27 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी होगी.

चुनावों के अनुसार, नेतन्याहू के नेतृत्व वाले दलों के गुट और उनके मुख्य प्रतिद्वंद्वी गादी आइसेनकोट के नेतृत्व वाले दलों के गुट ने संसद में लगभग 51-51 सीटें हासिल की हैं. शुरुआती एग्जिट पोल में संकेत मिला था कि आइसेनकोट के गुट को थोड़ी बढ़त हासिल है. बहुमत वाली गठबंधन सरकार बनाने के लिए किसी उम्मीदवार को संसद में 61 सीटों की जरूरत होती है. एग्जिट पोल के मुताबिक, अरब दलों ने बाकी बची 18 सीटें जीती हैं.