Iran US-Israel War: ईरान की सुप्रीम लीडरशिप का खात्मा करने के दावे के साथ ही अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को एक बयान जारी किया. इसमें उन्होंने कहा कि उन्होंने ही ईरान पर हमले का आदेश दिया था. इससे तेहरान न्यूक्लियर डेवलपमेंट और बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम पर रोक लगाई जा सके. ट्रंप ने साथ ही कहा है कि हम ईरान को परमाणु संपन्न देश नहीं बनने देंगे. वह तेजी से इसी ओर बढ़ रहा था. 

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ट्रंप ने दो वीडियो जारी किए हैं. इनमें उन्होंने ईरान के परमाणु संपन्न होने की ओर बढ़ते कदम पर बात की. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, ट्रंप ने कहा है कि ईरान से खतरा होने वाला था. हालांकि, उन्होंने किसी तरह के सबूत नहीं रखे हैं. 

हमला करना हमारा सबसे अच्छा मौका था- ट्रंप

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ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि यह हमला करने का हमारा आखिरी और सबसे अच्छा मौका था. इस खतरनाक सरकार के खतरों को खत्म करना हमारा मकसद था. हमने अंदाजा लगाया था कि यूएस की मुहीम चार से पांच हफ्ते तक चलेगा. यह और भी लंबा चल सकता है. लड़ाई का मुख्य मकसद ईरान को न्यूक्लियर हथियार बनाने से रोकना था. इससे ईरान ने कई बार इनकार किया. साथ ही लंबी दूरी बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम को भी नाकाम करना हमारा लक्ष्य था. 

ट्रंप ने कहा कि लंबी दूरी की मिसाइलों और परमाणु हथियारों से लैस ईरानी सरकार मिडिल ईस्ट के लिए और अमेरिका के लोगों के लिए बहुत बड़ा खतरा सबित हो सकती है. 

हमने 10 ईरानी जहाजों को मार गिराया- ट्रंप

यूएस के राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने बयान में दावा किया कि अमेरिकी सेना ने 10 ईरानी जहाजों को मार गिराया. वह समुद्र में डूबो दिए गए हैं. अमेरिका की सेना बड़े स्तर पर ईरान में लड़ाकू ऑपरेशन चला रही है. इस भयानक और आतंकवादी शासन से अमेरिका को होने वाले खतरे को कम किया जा सके. हमारा मकसद ईरान की मिसाइल क्षमताओं को नष्ट करना था. उनकी नेवी को खत्म करना था. उन्हें न्यूक्लियर हथियार रखने से रोकना था. 

इसके अलावा उन्होंने कहा कि हमारा तीसरा मकसद  ईरान को मिलिटेंट ग्रुप्स को समर्थन करने से रोकना था. साथ ही ट्रंप ने चार सैनिकों की जान गंवाने को लेकर भी अपनी बात कही है. 

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