ईरान ने युद्ध के बीच चेतावनी दी है. उन्होंने कहा है कि अगर उसके ऊर्जा और ईंधन से जुड़े ठिकानों पर हमला किया गया तो वह इसका कड़ा जवाब देगा. ईरान ने कहा है कि उसका जवाब सिर्फ सेना तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वह अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के अहम ढांचों को भी निशाना बना सकता है. ईरान के सरकारी मीडिया Islamic Republic of Iran Broadcasting (IRIB) के अनुसार, यह बयान ईरान के सैन्य मुख्यालय के प्रवक्ताइब्राहिम ज़ोल्फ़ागरीने दिया. उन्होंने कहा कि अगर ईरान के तेल और गैस से जुड़े ढांचों पर हमला हुआ, तो जवाब में अमेरिका और उसके क्षेत्रीय सहयोगियों के एनर्जी सिस्टम, IT सिस्टम और पानी साफ करने वाली सुविधाओं को निशाना बनाया जाएगा.

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ईरान की तरफ से ये बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी सेना के बड़े अधिकारी ईरान के खिलाफ आगे की कार्रवाई को लेकर तैयारी कर रहे हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पेंटागन ने ईरान में जमीनी सेना भेजने तक की योजना पर चर्चा की है, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत कार्रवाई की जा सके. इस पूरे मामले में डोनाल्ड ट्रंप का रुख भी सामने आया है. उन्होंने कहा कि अभी वह किसी भी जगह सेना भेजने की योजना नहीं बना रहे हैं, लेकिन अगर ऐसा करना पड़ा तो इसकी जानकारी पहले से नहीं देंगे.

व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी का बयान

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मामले पर व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने कहा कि सेना की तैयारी सिर्फ इसलिए की जाती है ताकि राष्ट्रपति के पास हर स्थिति में फैसले लेने के लिए विकल्प मौजूद रहें. इसका मतलब यह नहीं है कि कोई अंतिम फैसला हो चुका है. ANI के रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी सेना ने संभावित हालात के लिए कई तरह की तैयारियां शुरू कर दी हैं. इसमें ईरान के लोगों या लड़ाकों को पकड़ने और उन्हें कहां रखा जाएगा, इस पर भी चर्चा की गई है. साथ ही 82वां एयरबोर्न डिवीजन और मरीन फोर्स को भी तैयार रखा जा रहा है. हजारों अमेरिकी सैनिक पहले ही मध्य पूर्व की ओर भेजे जा रहे हैं. हाल ही में करीब 2200 मरीन सैनिकों को लेकर तीन जहाज कैलिफोर्निया से रवाना हुए हैं.

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